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सीसीएसयू : प्राइवेट मोड परीक्षा पर विवाद तेज, यूजीसी ने सात दिन में मांगा जवाब

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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) में एनईपी लागू होने के बाद प्राइवेट मोड में मात्र दो महीने में पंजीकरण एवं परीक्षा का विवाद बढ़ता जा रहा है। यूजीसी ने मामले में दर्ज आपत्तियों का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय से सात दिनों के अंदर जवाब मांगा है कि मौजूदा समय में किन नियमों के तहत ये परीक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
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बता दें कि डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो (डीईबी) ने इसे आवश्यक बताते हुए तय समय सीमा में जवाब देने के निर्देश दिए हैं। देशभर में रेगुलर क्लास के अलावा अन्य सभी मोड (दूरस्थ एवं ऑनलाइन) में पठन-पाठन एवं परीक्षा की निगरानी डीईबी करता है। डीईबी ने विभिन्न विश्वविद्यालयों में ओडीएल (ओपन डिस्टेंस लर्निंग) एवं ऑनलाइन मोड के पाठ्यक्रमों को अलग-अलग श्रेणियों में मान्यता दी है।
सीसीएसयू में यूजी-पीजी स्तर पर डीईबी से मात्र नौ पाठ्यक्रमों को ही ओडीएल में अनुमति है। इसमें यूजी में बीए और बीकॉम शामिल नहीं हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय का जवाब प्राइवेट फॉर्म पर जारी असमंजस को दूर करने के लिए निर्णायक साबित होगा।
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स्ष्ट हवाला दें, नहीं तो हाईकोर्ट जाएंगे : यादव
सेल्फ फाइनेंस कॉलेज फेडरेशन के अध्यक्ष नितिन यादव ने कहा कि यदि यूजी-पीजी में प्राइवेट मोड वैध है तो यूजीसी एवं सीसीएसयू नियमों का स्पष्ट हवाला दें। ग्रामीण छात्रों एवं आय का हवाला देकर ऐसी डिग्री नहीं चलनी चाहिए जो भविष्य में लाखों छात्रों को सड़क पर ला दे। यदि स्पष्ट जवाब नहीं मिला तो प्राइवेट फॉर्म नोटिफिकेशन होते ही हाईकोर्ट का रुख करेंगे।
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