संवाद न्यूज एजेंसी
बहसूमा। क्षेत्र में पशुओं को खिलाने वाले चारे का ईंधन के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। भूसे से पकाई जाने वाली कमजोर ईंटें भट्ठा मालिकों के लिए मोटा मुनाफा कमाने का जरिया बन गया है। ईंट भट्ठों पर नियम कायदों की अनदेखी की जा रही है।
क्षेत्र में अधिकतर भट्ठा मालिकों द्वारा नियम कायदों को ताक पर रखकर मोटा मुनाफा कमाने के के चक्कर में कानून का भी पालन नहीं किया जा रहा है। मोटा मुनाफा कमाने वालों को न तो वातावरण को दूषित करने की चिंता है और न ही भट्ठा नियमों की। नियम के तहत ईंट कोयले से ही पकाई जाती है लेकिन बहसूमा व रामराज क्षेत्र में उक्त नियमों की परवाह किए बिना भट्ठे में पशुओं का चारा धकेला जा रहा है।
भट्टा मालिकों द्वारा ईंट पकाने के लिए पशुओं को खिलाए जाने वाली भूसा और सरसों की खली आदि का खुलेआम प्रयोग किया जा रहा है। जो कोयले से काफी सस्ते दामों में आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। ईंट पकाने वाले मजदूरों ने बताया कि भूसे से पकाई जाने वाली ईंटों में चमक तो होती है लेकिन वह काफी कमजोर होती हैं। भट्ठों पर दिखावे के लिए बहुत कम मात्रा में कोयला जरूर पड़ा दिखाई देता है लेकिन अक्सर उसे प्रयोग नहीं किया जाता है। इसके अलावा भट्ठों के आसपास रहने वाले ग्रामीण चिमनी से निकलने वाले काले धुएं से काफी परेशान हैं। आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
एसडीएम संतोष कुमार का कहना है कि भट्ठों पर प्रयोग की जाने वाली ईंधन की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी भट्ठे पर गड़बड़ी मिलती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।