मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट में पांच विधानसभा (शहर, दक्षिण, कैंट, किठौर और हापुड़) हैं। इन सभी में मुस्लिमों ने ज्यादातर सपा को प्राथमिकता दी। दलितों में सपा और बसपा में बंटवारा नजर आया। कई क्षेत्रों में शुरू में दलित मतदाता हाथी की सवारी करते तो दिखे, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा उनका रुझान साइकिल की तरफ नजर आया।
हालांकि शहर के मुकाबले देहात में एससी वोटर का रुझान बसपा की तरफ भी काफी रहा। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में मतदान केंद्रों पर लंबी-लंबी कतारें उनके मतदान प्रतिशत बढ़ने की तरफ इशारा कर रही हैं। भाजपा खेमा दलित के बंटवारे को अपने लिए अच्छा मान रहा है।
मुस्लिम बूथों पर मतदान
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यह चुनाव 2014 और 2019 से थोड़ा है। 2014 में मोदी लहर के बीच मुजफ्फरनगर दंगे के चलते ध्रुवीकरण नजर आया था, जबकि 2019 में पुलवामा की घटना और पाकिस्तान पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक ने ध्रुवीकरण को बरकरार रखा था।
2019 में बसपा-सपा-रालोद का गठबंधन था, जिसके प्रत्याशी हाजी याकूब कुरैशी ने एससी-मुस्लिम गठजोड़ के सहारे भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र अग्रवाल को कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि शहर से देहात तक ध्रुवीकरण की हवा चलने से राजेंद्र अग्रवाल कम अंतर से जीत गए थे। इस बार भी भाजपा का परंपरागत वोट वैश्य, गुर्जर, जाट, ब्राह्मण, सैनी, कश्यप, प्रजापति, पाल, वाल्मीकि भाजपा के साथ खड़ा दिखाई दिया है।
बंटवारा त्यागी समाज के वोटों में भी हुआ। आमतौर पर यह वर्ग भाजपा का वोटर रहा है। मुस्लिम बहुल इलाकों में मत किसे देना है, इसे लेकर किसी तरह का कोई भ्रम नहीं था। 2019 के चुनाव में दलित वोट बैंक का एक हिस्सा भाजपा में भी गया था, जो इस बार नाममात्र माना जा रहा है।
मेरठ में मुस्लिम बूथों पर मतदाता
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जयंत चौधरी पत्नी के साथ
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छपरौली व मोदीनगर पर टिकी नजर
बागपत लोकसभा सीट पर मतदान की स्थिति को देखते हुए चुनाव फंसता हुआ दिखाई दे रहा है। बागपत लोकसभा सीट के सभी विधानसभा क्षेत्रों का मिजाज अलग-अलग है। इनमें शामिल छपरौली को चौधरी परिवार का गढ़ कहा जाता है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में वर्ष 1937 से लगातार वहां चौधरी परिवार या उनकी पार्टी का कब्जा है। लोकसभा चुनाव में भी चौधरी परिवार को वहां से हमेशा 30 हजार से ज्यादा बढ़त मिलती रही है।
हालांकि पिछले दो लोकसभा चुनाव से छपरौली में चौधरी परिवार की पकड़ कमजोर होती दिखी। मगर वह उस स्थिति में रहा, जब भाजपा सीधे टक्कर में रही। इस बार रालोद के साथ भाजपा थी तो वहां यह माना जा रहा है कि छपरौली से रालोद को बड़ी बढ़त मिल सकती है। अगर किसी जगह सपा को बढ़त मिलती है तो छपरौली ही उस बढ़त को दूर करेगी।
इसलिए ही छपरौली से बड़ी बढ़त की उम्मीद जताई जा रही है। मगर वहां वोट प्रतिशत कम रहने से रालोद-भाजपा की चिंता भी बढ़ी है। इसी तरह मोदीनगर से हर बार भाजपा को बढ़त मिलती रही है, मगर इस बार सपा प्रत्याशी ब्राह्मण होने से उस पर संशय बना हुआ है। यहां मिलने वाले पार्टियों को वोट भी हार-जीत तय करने में अहम होंगे।
मोदीनगर से भाजपा को मिलती रही बढ़त
मोदीनगर से 2014 में करीब 68 हजार वोटों की बढ़त भाजपा को मिली थी। 2019 में 37 हजार वोटों से आगे थे। इस सीट पर ब्राह्मण वोटर काफी हैं। इसको देखते हुए ही सपा ने ब्राह्मण कार्ड खेला था। यहां वोटर काफी बंटता हुआ नजर आया। कुल मिलाकर बागपत और छपरौली विधानसभा क्षेत्र पर हार-जीत का दारोमदार टिका है।
भाजपा प्रत्याशी अरुण गोविल
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विकास की होगी क्रांति : अरुण
मेरठ से भाजपा प्रत्याशी अरुण गोविल ने कहा कि हम चुनाव जीतेंगे और विकास की क्रांति होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अबकी बार 400 पार का नारा सफल होगा। मेरठ की जनता के स्नेह और समर्थन से अभिभूत हूं।
एक लाख से जीतूंगी : सुनीता वर्मा
सपा गठबंधन प्रत्याशी सुनीता वर्मा का दावा है कि उनका किसी से मुकाबला नहीं है। सर्वसमाज ने एकजुट होकर वोट दिया है। सपा गठबंधन हर हाल में चुनाव जीतेगा। हर बूथ पर वोट मिला है। करीब एक लाख वोट से जीत होगी।
जनता का आभारी हूं : देवव्रत त्यागी
मेरठ-हापुड लोकसभा सीट के बसपा प्रत्याशी देवव्रत त्यागी ने कहा कि लोकसभा सीट की जनता ने उन्हें पूरा प्यार दिया है। सभी मतदाताओं का आभार है। सर्वसमाज का वोट मिला है। बसपा जीत रही है। विरोधियों के दावे धरे रह जाएंगे।
सपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा ने पति के साथ वोट डाला।
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जीत को लेकर आश्वस्त हूं : डाॅ. राजकुमार सांगवान
बागपत से रालोद-भाजपा गठबंधन प्रत्याशी डाॅ. राजकुमार सांगवान ने कहा कि वह जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व चौधरी जयंत सिंह के हाथ मजबूत करने के लिए वोट किया है। सबका आशीर्वाद मिला।
हर वर्ग ने वोट दिया: अमरपाल शर्मा
सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी अमरपाल शर्मा कहते हैं कि वह अच्छे वोटों से जीत रहे हैं। सरकार से परेशान होकर और भविष्य को देखते हुए हर वर्ग के लोगों ने वोट दिया है। उससे ही जीत तय हो गई है।
मेरा किसी से मुकाबला नहीं: प्रवीण बंसल
बसपा प्रत्याशी प्रवीण बंसल ने कहा कि युवा बेरोजगारी से परेशान है। महंगाई से लोगों की हालत खराब है। इससे जनता परेशान होकर सत्ता पक्ष के विरोध में वोट कर बसपा को जिताने का काम कर रही है। बसपा की किसी से कोई टक्कर नहीं है।