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अहंकार त्यागें, हृदय से करें अराधना, : आचार्य सौरभ सागर

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दिगंबर जैन मंदिर तीरगरान में सात सौ इंद्र-इंद्राणियों ने श्री मंशापूर्ण महावीर विधान में लिया भाग
आज 27 तीर्थंकरों की प्रतिमाएं होंगी विराजमान
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। दिगंबर जैन मंदिर तीरगरान में आचार्य सौरभ सागर महाराज के सानिध्य में वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन श्री मंशापूर्ण महावीर विधान हुआ। इसमें करीब 700 इंद्र-इंद्राणियों ने भाग लिया। आचार्य की प्रातः और सायंकालीन गुरु भक्ति में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने चरण वंदना की।
प्रवचन में आचार्य ने कहा कि भगवान महावीर की आराधना केवल मंदिर में दीप जलाना नहीं, बल्कि अपने भीतर ज्ञान, करुणा और अहिंसा का दीप जलाना है। भगवान के चरणों में सिर झुकाने के साथ अहंकार त्यागना और क्रोध, मान, माया व लोभ से दूर रहना भी जरूरी है। पूजा तभी सार्थक है, जब भगवान के सिद्धांत हमारे व्यवहार में दिखाई दें।
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शांतिधारा का सौभाग्य सनत कुमार जैन और संचय जैन, कवाल वाले परिवार को मिला। पंडित सजल जैन शास्त्री के प्रतिष्ठाचार्यत्व में विधान संपन्न हुआ। लकी ड्रॉ में एक फ्रिज और 10 प्रेशर कुकर विजेताओं को दिए गए।
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मेरठ जैन समाज के अध्यक्ष सुरेश जैन रितुराज ने बताया कि 12 अक्तूबर को महोत्सव के अंतिम दिन श्री मंशापूर्ण महावीर विधान होगा। इस दौरान मूलनायक भगवान महावीर सहित 27 अन्य तीर्थंकरों की प्रतिमाएं जिनालय में विराजमान की जाएंगी। कार्यक्रम में सुरेंद्र जैन, मुख्य संयोजक रितेश जैन, हंस कुमार जैन, राजीव जैन, वीरेंद्र जैन, संजय जैन, अनिल जैन रहे।
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