शहर की एक चेस्ट ब्रांच के अधिकारी ने बताया कि उनकी चेस्ट से 48 एटीएम जुडे़ हैं। इनके लिए प्रतिदिन 15-20 करोड़ रुपये की डिमांड है। लेकिन करेंसी की कमी की वजह से केवल 5 से 6 करोड़ रुपये ही दे पा रहे हैं। आउट सोर्स कंपनियों का दबाव भी बढ़ रहा है।
कई एटीएम में नहीं मिला कैश
सोमवार को अमर उजाला टीम ने दोपहर दो से चार बजे के बीच शहर के आउटर और ग्रामीण क्षेत्रों के एटीएम का हाल परखा तो हालात खराब मिले। कई एटीएम में कैश नहीं था। लोग यहां से खाली हाथ ही लौट रहे थे।
इलाहाबाद बैंक डिवाइडर रोड : इस एटीएम में कैश नहीं था। यहां कैश लेने आए दीपक कुमार, मोहित और प्रवीण ने बताया कि वो आसपास के एटीएम भी गए, लेकिन कैश कहीं नहीं था। एक एटीएम खराब बताया गया।
पीएनबी, डिवाइडर रोड : यहां भी नो कैश बताया गया। रुपया निकालने आए पल्लवपुरम के अंकित मित्तल ने बताया कि वो दिन में दो बार एटीएम पर आए चुके हैं। लेकिन कैश नहीं मिला। मायूस होकर लौटना पड़ा।
एसबीआई, बक्सर टैंपो स्टैंड : एसबीआई के इस एटीएम में भी कैश नहीं था। लोग खाली हाथ लौट रहे थे। लोगों का कहना था कि नोटबंदी के बाद से तो एटीएम सुविधा लगातार बदहाल होती जा रही है।
बीओबी, निकट कंकरखेड़ा थाना : इस एटीएम पर भी कैश नहीं था। यहां पर मौजूद लोग बोले, लगता है कि नोटबंदी जैसे हालात फिर से बन रहे हैं। सरकार केवल डिजिटल इंडिया की बात कर रही है, लेकिन उपलब्ध संसाधनों को सुधार नहीं पा रही है।
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