बुशरा और आसपास के लोगों ने बताया कि शाहबाज अच्छे इंसान थे। उनको भारत देश से बहुत लगाव था। उनके मोबाइल फोन पर भी भारत का झंडा लगा था। लोगों को हमेशा एक ही बात बताते थे कि सबका एक ही मजहब होता है। धर्म से ऊपर उठकर काम करना चाहिए। गरीब लोगों से शहबाज कभी पैसा नहीं लेते थे।
हर साल पूरी करते थे कानूनी प्रक्रिया
पुलिस के मुताबिक शाहबाज हर साल कानूनी प्रक्रिया पूरी करते थे। एलआईयू के पास भी उनके पूरे दस्तावेज हैं। उनकी मौत की खबर लगते ही एलआईयू टीम बुशरा के घर पहुंची। बुशरा से शव को सुपुर्द-ए-खाक कराने को कहा। लेकिन बुशरा ने शाहबाज के बेटे के आने की बात एलआईयू अफसरों को बताई।
दो दिन से रखा रहा शव
बुशरा ने दो दिन से शाहबाज के शव को बर्फ पर रखा। दरअसल जावेद ने बुशरा से कहा था कि वह अफगानिस्तान से चल दिया है। उसके पिता के शव को सुरक्षित रखवा दो। सोमवार सुबह जावेद पहुंचा और सारी प्रक्रिया पूरी कराकर पिता के शव को अफगानिस्तान लेकर रवाना हो गया। पुलिस ने सारे कागज करीब आठ घंटे में पूरे करा दिए।
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