उधर, सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि 2015 के रजिस्टर के गायब होने की जानकारी चार वर्षों से विभागीय व कार्यालय के अधिकारियों को क्यों नहीं लगी। कहीं कार्यालय के अधिकारी या कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध तो नहीं है। इसके अलावा सवाल यह भी है कि क्या किसी दस्तावेज के सत्यापन को प्रभावित करने के लिए रजिस्टर को जानबूझकर गायब तो नहीं किया। अभी ये तमाम सवाल अनुत्तरित है।
कहा जा रहा है कि 21 सितंबर को कार्यालय का निरीक्षण किया। तब जाकर यह मामला प्रकाश में आया, परंतु विगत बीस दिन तक भी पूरे प्रकरण को दबाकर रखा गया। ये सभी सवाल कार्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों की सत्यनिष्ठा पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं।
गौरतलब है कि विगत 14 /15 मई की रात को इसी कार्यालय का ताला तोड़ दिया। इसकी लिखित सूचना भी थाना पुलिस को दी, परंतु उस समय विभागीय अधिकारियों ने दावा किया कि कार्यालय से कुछ भी गायब नहीं हुआ है। उधर, कुछ लोग दबी जबान से कहते है कि पूरा मामला बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा कर रहा हैं।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/