यदि आप आरटीओ आफिस के बाहर बैठे दलालों से वाहन का बीमा करा रहे हैं तो सावधान हो जाइये। यह फर्जी भी हो सकता है। वाहन बीमा कंपनियाें के पास पिछले कुछ माह में ऐसे दो दर्जन से ज्यादा मामले आ चुके हैं। जिसमें दुपहिया वाहन से लेकर बड़े वाहनों तक के फर्जी बीमे हुए हैं।
ऐसे हुआ फर्जी बीमे का खुलासा
सरधना के जैनपुर निवासी रणजीत सिंह अपने महेंद्रा ट्रैक्टर का बीमा नवीनीकरण कराने पहुंचे। उनका पुराना बीमा न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से हुआ था। जब उनके पुराने बीमे का रिकार्ड देखा गया तो वह कंपनी में कहीं मौजूद नहीं था। इस पर रणजीत सिंह ने बताया कि जिसने उन्हें ट्रैक्टर बेचा है, उसने ही उनका नाम ट्रांसफर कराते वक्त बीमा कराकर दिया था। रणजीत सिंह ने यह भी बताया कि उक्त बीमा आरटीओ के बाहर बैठे दलाल द्वारा किया गया था।
कई मामलों का हो चुका है खुलासा
वाहन बीमा कंपनियों के कर्मचारियों के अनुसार पिछले छह माह के दौरान करीब दो दर्जन से ज्यादा अलग-अलग मामले ऐसे आ चुके हैं। जिनमें जब ग्राहक नवीनीकरण कराने आता है तो उसका कोई रिकार्ड हमारे यहां मौजूद नहीं होता है। इसके बाद अधिकांश ग्राहक तो लड़ाई तक करते हैं और हमें झूठा बताते हैं। लेकिन जब इसकी पड़ताल की गयी तो पता चला कि ऐसे सभी बीमे आरटीओ के बाहर कराये गये थे।
फिटनेस और ट्रांसफर केस में फर्जीवाड़ा
यूपी पुलिस
ये फर्जी वाहन बीमों के अधिकांश मामले वाहनों के फिटनेस या ट्रांसफर में सामने आये हैं। वाहन स्वामी को आरटीओ में वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट लेने या खरीदने - बेचने पर इंश्योरेंस सर्टिफिकेट भी देना होता है। ऐसे वक्त में लोग इन दलालों के चक्कर में कम पैसे का बीमा कराने को तैयार हो जाते हैं और फर्जी बीमा करा लेते हैं। 700 का बीमा 200 रुपये में टू व्हीलर का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस इस समय 700 रूपये में होता है। लेकिन बाहर बैठे दलाल इसी इंश्योरेंस को 200 रुपये में कर देते हैं। यही नहीं 20000 हजार रुपये के बीमे पर ये दलाल दो हजार रूपये लेकर इंश्योरेंस सर्टिफिकेट तैयार कर देते हैं।
ऐसे होता है फर्जीवाड़ा
आरटीओ के बाहर बैठे दलाल वैध बीमा भी कराते हैं। ऐसे ही तमाम गाड़ियों के इंश्योरेंस जिसमें दुपहिया, चौपहिया छोटे, बड़े, व्यवसायिक आदि होते हैं। इन वाहनों के इंश्योरेंस सर्टिफिकेट की कॉपी अपने पास सेव करके रख लेते हैं। इसके बाद फर्जीवाड़े के लिए फोटो शॉप में जाकर नाम, वाहन नंबर, डेट आदि को बदलकर ये फर्जी इंश्योरेंस की कॉपी ग्राहक को थमा देते हैं। इस फर्जी इंश्योरेंस के जरिये वाहन स्वामी की गाड़ी का फिटनेस और ट्रांसफर आदि का काम हो जाता है।
आरटीओ अधिकारी नहीं करते जांच
इस पूरे फर्जीवाड़े में आरटीओ अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठ रहे हैं। क्योंकि जब वाहन स्वामी उन्हें तमाम अभिलेख उपलब्ध कराता है तो वह उसकी जांच क्यों नहीं करते। वाहन के कागजात का तो वह अपने रिकार्ड से मिलान कर लेते हैं, लेकिन बीमा और उसके निवास संबंधी प्रमाण पत्रों की जांच नहीं करते हैं। जिस कारण इस फर्जीवाड़े को लगातार बढ़ावा मिल रहा है।
वर्जन..........
हां ऐसा है और ये थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में ज्यादा है। इसलिए हम ग्राहक को हमेशा समझाते हैं वह थर्ड पार्टी इंश्योरेंस जितना हो सके ऑफिस में ही आकर कराये। क्योंकि बाहर गड़बड़ी की आशंका रहती है।
विलियम्स रिचर्ड मैंजिस, वरिष्ठ प्रबंधक न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी