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सेहत की बात: पीरियड्स-गर्भावस्था और मेनोपॉज, महिलाओं की सेहत पर डॉ. योगिता करवल से खास बातचीत

Wed, 07 Jan 2026 05:13 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. योगिता करवल ने कहा कि कॅरियर, तनाव और देरी से शादी के कारण महिलाओं में गर्भाधान की समस्या बढ़ रही है। स्वस्थ दिनचर्या और पोषण पर जोर दिया।

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डॉ योगिता करवल, स्त्री रोग विशेषज्ञ- जिला महिला अस्पताल मेरठ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य बनाने की चाह में किशोरियों और युवतियों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। पिछले कुछ समय से महिलाओं में गर्भाधान में अवरोध की समस्या बढ़ रही है। कॅरिअर के चक्कर में देर से शादी और स्वास्थ्य की जटिलताओं के कारण महिलाएं संतान सुख से वंचित हो रही हैं। इसलिए मौजूदा हालात में तनाव से दूर रहते हुए स्वस्थ दिनचर्या, बेहतर पोषण के साथ महिलाओं को सेहत का ध्यान रखना जरूरी है।

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महिलाओं के स्वास्थ्य पर अमर उजाला से बातचीत के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. योगिता करवल ने यह चिंता जाहिर की। पिछले 14 साल से महिला जिला अस्पताल में सेवारत डॉ. योगिता ने बातचीत के दौरान कई महत्वपूर्ण बातें बताईं। इसके साथ ही महिला स्वास्थ्य से जुड़े अहम सवालों के जवाब भी दिए। इससे जुड़ी अधिक जानकारी और वीडियो के लिए आप दिए गए कोड को स्कैन कर सकते हैं।

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महिलाओं की समस्या - फोटो : Freepik.com
आज के समय में किशोरियों, युवतियों सहित सभी महिलाओं में कौन-सी स्वास्थ्य समस्याएं ज्यादा देखने को मिल रही हैं?
हार्मोंस का असंतुलन होना, शरीर में कमजोरी के अलावा 30 साल के बाद गर्भाधान में समस्या भी सामने आ रही हैं। इसका प्रमुख कारण असमय खानपान और पहले की तुलना में शारीरिक गतिविधियां कम होना है। इन हालात में आयरन और पोषक तत्वों की कमी से महिलाएं एनीमिया की शिकार हो रही हैं। स्वस्थ रहने के लिए अधिक शारीरिक कार्य करना जरूरी है।

स्वस्थ जीवन शैली के लिए जागरूक होने पर भी महिलाओं में कमजोरी की समस्या का कारण क्या है?
भविष्य संवारने की भागदौड़ और अव्यवस्थित दिनचर्या, खानपान में पोषण की कमी और नींद पूरी न होने के कारण महिलाओं में कमजोरी की समस्या आ रही है। पिछले एक साल में चिड़चिड़ापन, कमजोरी से थैलेसीमिया की बीमारी के मरीज बढ़े हैं।

पीसीओएस की समस्या - फोटो : Freepik.com
महिलाओं में गर्भाधान न होने की मुख्य क्या कारण हैं? 
उम्र बढ़ने के साथ प्रजनन क्षमता घटने लगती है। गर्भाधान का सही समय 25 से 30 वर्ष है। कॅरिअर बनाने की चिंता सहित अन्य कारणों से समय पर शादी न होने, असंतुलित खानपान और हार्मोनल समस्याएं इसके लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं।

लड़कियों में कौन ही समस्या आम है, जिसे हल्के में लिया जा रहा है?
बेहतर शिक्षा और कॅरिअर बनाने के अवसाद में लड़कियां सबसे अधिक परेशान हैं। इसका सीधा असर उनके पीरियड्स पर हो रहा है। एनीमिया की समस्या को भी हल्के में लेने के कारण हालात गंभीर हो रहे हैं।
 
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गर्भावस्था - फोटो : istock
बिना सर्जरी प्रसव अब जटिल हो गया है, ये कैसे संभव हो सकता है?
बिना ऑपरेशन के अब भी सफल प्रसव हो सकता है। जेन जी जेनेरशन की महिलाओं में दर्द सहने की क्षमता बेहद कम है। इसका बड़ा कारण शारीरिक रूप से सशक्त न होना है। अब अधिकतर महिलाएं घरेलू कार्य खुद करने की बजाय मशीनों से कर रही हैं।

एक स्वस्थ महिला केे गर्भाधारण के समय क्या पोषण जरूरी है?
नियमित टीकाकरण अवश्य होना चाहिए। पालक, चुकंदर, गुड़ और दालों का अधिक प्रयोग किया जाना चाहिए। वहीं, विटामिन-सी के लिए अमरुद, संतरे जैसे फल खा सकते हैं। केला, दूध, दही, पनीर युक्त फल जैसे आहार नियमित रूप से लेना जरूरी है। वहीं नियमित अंतराल पर अल्ट्रासाउंड से जांच कराते रहें।
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