दोनों परिवारों के दिन हंसी-खुशी बीत रहे थे। एक हादसे से दोनों ही परिवारों की खुशियों को ग्रहण लग गया। अंकुर और रोहित दोनों के बीच घनिष्ठ मित्रता थी। अंकुर जब भी छुट्टी पर गांव आता तो रोहित के साथ काफी समय व्यतीत करता था। किसी ने सोचा भी नहीं था कि दोनों दोस्त इस तरह एक साथ दुनिया छोड़ जाएंगे।
अंकुर अपने तीन भाइयों में सबसे छोटा था। पिता करनपाल खेती करते हैं। वह आठ वर्ष पूर्व नेवी में जीडी के पद पर तैनात हुआ था। इस समय वह कोच्चि में सीओटी के पद पर तैनात था। 10 फरवरी को अंकुर छुट्टी लेकर घर आया था। 13 मार्च को उसकी वापसी होनी थी।
बेटे की मौत की जानकारी मिलते ही करनपाल समेत अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अंकुर की इकलौती तीन साल की पुत्री को गोद में लेकर बार-बार कह रहे थे कि भगवान तूने यह क्या कर दिया। इस मासूम बच्ची के सिर से बाप का साया छीन लिया।
उधर, रोहित एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षक था। दो भाइयों में रोहित बड़ा था। रोहित का एक पांच साल का पुत्र और तीन साल की एक पुत्री है। उसके पिता यशपाल सिंह भी खेती करते है। रोहित के घर भी मौत की सूचना मिलने पर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों को ग्रामीण ढांढस बंधाते रहे।