कैंट क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क पहले ही कमजोर रहता है। लेकिन अब नोटबंदी के बाद पेमेंट के एडवांस मोड कैंट क्षेत्र में सफल नहीं हो रहे। सदर बाजार में पेटीएम और एटीएम कार्ड फेल साबित हो रहे हैं। यहां मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण भुगतान में व्यापारी और ग्राहकों को देरी भुगतनी पड़ रही है। कैश की किल्लत के बीच डिजिटल पेमेंट में मोबाइल नेटवर्क की कमजोरी ने समस्या और बड़ी कर दी है।
नोटबंदी से कैश की किल्लत हुई तो डेबिट, क्रेडिट कार्ड और पेटीएम जैसे मोड ने राहत दी। कैंट क्षेत्र में इस राहत पर भी आफत है। पेमेंट मोबाइल से करना हो या डेबिट कार्ड से दोनों में नेटवर्क चाहिए। कैंट में वही सही नहीं है। नई स्वैप मशीन सिम कार्ड से चलती हैं। दो कंपनियां स्वैप मशीन के लिए सिम कार्ड दे रही हैं। कैंट क्षेत्र में बीएसएनएल के अलावा दूसरे कंपनियों का नेटवर्क बेहद कमजोर है। फोन पर बात सही से नहीं हो पाती। जिससे यहां के दुकानदारों और ग्राहक दोनों को परेशानी है। ग्राहक से जब डेबिट कार्ड से पेमेंट लेने की बात आती है, तो स्वैप मशीन को लेकर दुकान में इधर-उधर लेकर दौड़ना पड़ता है। कुछ व्यापारी तो दुकान के बाहर मशीन लाकर कार्ड स्वैप करते हैं। पेटीएम की भी यही हालत है।
नेटवर्क की बड़ी समस्या
डेबिट कार्ड हो या पेटीएम, दोनों के भुगतान में नेटवर्क की बड़ी समस्या है। ग्राहक सामान लेकर भुगतान नहीं होने की वजह से वापस छोड़कर चले जाते हैं। स्वैप स्वाइप मशीन का नेटवर्क खोजने के लिए दुकान के बाहर जाना पड़ता है।- दीपक रस्तोगी, व्यापारी
यह बड़ी किल्लत
यह किल्लत कैश की किल्लत से बड़ी है। नेटवर्क नहीं होने की वजह से किसी का भुगतान हो जाता है, कोई वापस चला जाता है।- अशोक कुमार, उपाध्यक्ष, सदर बाजार व्यापार संघ
दोहरी मार पड़ रही
कैंट में मोबाइल नेटवर्क की समस्या से व्यापारियों पर दोहरी मार पड़ रही है। इस वजह से दुकानदारी आधी भी नहीं हो रही। स्वैप मशीन है, लेकिन नेटवर्क नहीं है।- अमित गुप्ता, व्यापारी
बोर्ड से मांग करेंगे
टॉवर की कमी की वजह से नेटवर्क की किल्लत रहती है। कई बार स्वैप मशीन नहीं चलती। कैंट बोर्ड से मोबाइल नेटवर्क बेहतर करने की मांग करेंगे।- विनोद जायसवाल, अध्यक्ष, सदर बाजार व्यापार संघ
काऊ स्कीम लटकी, नहीं लग रहे टावर
मेरठ। कैंट में चार मोबाइल टॉवर काम कर रहे हैं। मोबाइल नेटवर्क सुधारने की केंद्र सरकार की स्कीम काऊ (कम्युनिकेशन ऑन व्हील्स) को कैंट बोर्ड सफल नहीं बना पा रहा। मूवेबल टावर लगाने की स्कीम आई। लेकिन वह सरकारी ढर्रे का शिकार हो रही है। कई कंपनियों ने टावर लगाने के लिए आवेदन भी किए हैं। जबकि स्थानीय स्तर से इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
इस स्कीम में बड़े टावर की जगह छोटे मूवेबल टॉवर लगाए जा रहे हैं। दिल्ली में यह खूब काम कर रहे हैं। काऊ में फायर ब्रिगेड जैसी गाड़ी पर टॉवर खड़ा किया जाता है। इससे नेटवर्क की समस्या दूर हो जाती है। कैंट बोर्ड बैठक में काऊ लगाने पर चर्चा हो चुकी है। रक्षा मंत्रालय इसकी मंजूरी दे चुका है। फिर भी काऊ नहीं खड़े हो रहे। सूत्रों के मुताबिक कंपनियां टावर लगाने को तो तैयार हैं। लेकिन चढ़ावा चढ़ाने को नहीं। मोबाइल कंपनियां सीधे अपना टावर नहीं लगाती। उन्होंने कंपनियों को हायर कर रखा है। कंपनी सरकार को पैसे देने के लिए तैयार हैं।
तो समस्या हो जाए दूर
कैंट क्षेत्र में काऊ खड़े होते ही मोबाइल नेटवर्क की समस्या दूर हो जाएगी। न तो कॉल ड्रॉप होगी और न ही बात करने में परेशानी होगी। व्यापारियों को डेबिट कार्ड और पेटीएम आदि से भुगतान लेने में भी परेशानी नहीं आएगी। कैंट क्षेत्र में 16 काऊ खड़े करने की बात है। जिनसे नेटवर्क की समस्या दूर हो जाएगी।