छावनी परिषद की विशेष बोर्ड बैठक में बुधवार को वर्ष 2019-20 के लिए 139 करोड़ का बजट पास किया गया। बजट को स्वीकृति के लिए अब मध्य कमान लखनऊ भेजा जाएगा। स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर अनमोल सूद की गैरहाजिरी में कार्यवाहक स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर भारत भूषण ने शपथ लेकर बैठक कराई। बैठक के एक सूत्रीय एजेंडा 2019-20 के बजट को मुख्य अधिशासी अधिकारी प्रसाद चव्हाण ने बोर्ड के सामने रखा। बजट में 57 करोड़ रुपये कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के लिए रखे गए। वर्ष 2018-19 में छावनी परिषद को सिर्फ 16 करोड़ की ग्रांट ही सरकार से मिल पाई थी। वहीं, नौ करोड़ रुपये छावनी परिषद को सर्विस टैक्स के रूप मेें मिले थे। बोर्ड बैठक में एडम कमांडेंट कर्नल रोहित पंत, जीई साउथ एनए मैतई, सदस्य रिनी जैन, बुशरा कमाल, नीरज राठौड़, अनिल जैन, मंजू गोयल, धर्मेंद्र सोनकर आदि मौजूद रहे।
विशेष बोर्ड बैठक में चर्चा के दौरान उपाध्यक्ष ने छावनी परिषद की आय में इजाफे के लिए कैंट क्षेत्र में स्थित सिटी और कैंट स्टेशन से सर्विस टैक्स लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि आबूलेन पर स्थित बंगला नंबर 173 और 180 में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाया जाए। वहां बनने वाली दुकानों के किराए से आय में इजाफा होगा। सीईओ प्रसाद चव्हाण ने बताया कि रेलवे से वार्षिक एक करोड़ 90 लाख के आसपास टैक्स लिया जा सकता है। अनुमति के लिए इस प्रस्ताव को रक्षा मंत्रालय भेजा जा चुका है। बैठक में रेलवे से बीते साल का 12 करोड़ रुपये टैक्स वसूलने के लिए नोटिस जारी किया गया। इसके अलावा सदस्य अनिल जैन ने आबूलेन स्थित मंगल पांडे बाजार में बनाईं गई फड़ को व्यापारियों को आवंटित करने के लिए कहा। इससे कैंट बोर्ड की आय में इजाफा हो सके। सदस्य विपिन सोढ़ी ने बजट प्रस्ताव पर कहा कि छावनी परिषद को फंड आवंटन हो, इसके लिए सभी सदस्यों को मध्य कमान में जीओसी-इन-सी से मिलना चाहिए।
आबूलेन पर हटाया जाए डिवाइडर
उपाध्यक्ष बीना वाधवा ने आबूलेन बाजार में बनाए गए डिवाइडर को हटाने का प्रस्ताव भी बोर्ड बैठक में रखा। इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए अगली बोर्ड बैठक में विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यहां के व्यापारियों को समस्याएं आ रही हैं। पार्किंग व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। कैंट बोर्ड ने जो स्थल पार्किंग के लिए दिया है। वहां पार्किंग की व्यवस्था सुचारु नहीं की जा रही है।
अंग्रेजी समझ नहीं आती मुझे
बोर्ड बैठक में एक अजीबोगरीब मामला भी सामने आया। सदस्य अनिल जैन ने कहा कि बोर्ड के एजेंडे को अंग्रेजी में बना दिया जाता है। इससे कुछ बोर्ड सदस्यों को परेशानी होती है। इसलिए एजेंडे को हिंदी में भी प्रिंट किया जाए। उन्होंने कहा कि बैठक में अधिकांश चर्चा भी अंग्रेजी में होती है। जिसे समझने में कठिनाई आती है।