शहर की जनता को स्वच्छ और पीने का पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए भले ही सरकार 500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी हो, लेकिन सच्चाई यह है कि शहर की जनता के लिए पेयजल की कमी है। व्यवस्था बनाने को न तो जल निगम गंभीर है और न ही जलकल विभाग। शहर के अधिकतर इलाकों में पाइप लाइन, ट्यूबवेल, हैंडपंप, सबमर्सिबल लगे हैं। इनके संचालन और रखरखाव पर भी साल में 20 करोड़ से अधिक खर्च हो रहा है। कई इलाके ऐसे हैं, जहां लगभग 20 घंटे भूगर्भ जल दोहन कर पानी को नालियों में बहाया जा रहा है। कुछ इलाके ऐसे भी हैं, जहां न हैंडपंप हैं और न पानी की पाइप लाइन। बल्कि टैंकर से आपूर्ति की जा रही है।
शहर में निगम की पाइप लाइन का फैला जाल
महानगर में जेएनएनयूआरएम योजना के तहत जल निगम ने 725 किमी पानी की पाइप लाइन डाली हुई है। नगर निगम और एमडीए की पुरानी हजारों मीटर की पाइप लाइन है। सवाल है कि जब गंगाजल परियोजना की क्षमता 100 एमएलडी है, तो फिर अन्य पाइप लाइन को गंगाजल परियोजना से क्यों नहीं जोड़ा जा रहा है। बच्चा पार्क पर बने भूमिगत जलाशय समेत शहर के कई जलाशयों को भी नहीं जोड़ा गया है।
ये है गंगाजल योजना
जेएनएनयूआरएम के तहत 2010 में शहर में लगभग 350 करोड़ रुपये से 100 एमएलडी गंगाजल परियोजना की नींव रखी गई। भोले की झाल से लेकर शहर के विभिन्न इलाकों में पाइप लाइन डाली गईं। भोले की झाल पर गंगाजल ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया, जिससे शहर की जनता को 25 एमएलडी गंगाजल मिल रहा है। वहीं इसके अलावा करीब 150 करोड़ रुपये शहर की अन्य जल परियोजनाओं, पाइप लाइन और जल संसाधनों पर खर्च किए गए हैं।
गंगाजल परियोजना का लेखाजोखा
कुल लागत : 341.30 करोड़
मुख्य लाइन : 21.04 किलोमीटर
डिस्ट्रीब्यूशन लाइन : 725 किमी में बिछाई गई।
इन इलाकों तक ही पहुंच रहा गंगाजल
- सर्किट हाउस जलाशय की क्षमता पांच हजार किलोलीटर पानी की है। यहां से साकेत, सिविल लाइन क्षेत्र, सूर्य नगर, प्रगति नगर, आफिसर कालोनी, वेस्टर्न कचहरी रोड, शिवाजी रोड, नंगला बट्टू, अशोक वाटिका, प्रभातनगर, मोहनपुरी, मंगलपांडे नगर समेत 17 कालोनी एवं मोहल्लों तक गंगाजल पहुंच रहा है।
- घंटाघर टाउन हॉल जलाशय की क्षमता छह हजार किलोलीटर पानी की है। यहां से घंटाघर, पत्थर वालान, सरायलालदास, लाला का बाजार, नील गली, शीशमहल, डालमपाड़ा, होली चौक, कागजी बाजार, जलीकोठी, केसरगंज, छतरीवाला पीर, खैरनगर, शहर सराफा आदि इलाकों में सप्लाई होती है।
- शर्मा स्मारक जलाशय की क्षमता पांच हजार किलोलीटर है। यहां से बच्चा पार्क, ईव्ज चौराहा, छीपी टैंक, शिव चौक, बुढ़ाना गेट सहित आसपास के बड़े इलाके में गंगाजल की सप्लाई होती है।
- विकास पुरी जलाशय की क्षमता चार हजार किलोलीटर पानी की है। यहां से लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र, कांच का पुल, विकासपुरी आदि क्षेत्र से जुड़े इलाकों में पाइप लाइन तो डाली गयी है लेकिन सभी इलाकों में गंगाजल नहीं पहुंचता है। क्योंकि छोटी पाइप लाइन को मुख्य पाइप लाइन से जोड़ा ही नहीं गया है।
रिपेयर और विद्युत बिल पर साल में 10 करोड़ खर्च
सबमर्सिबल, ट्यूबवेल, हैंडपंप आदि की रिपेयर, विद्युत बिल पर प्रति वर्ष दस करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। उसके बाद भी जनता को कैंपर से पानी लेना पड़ रहा है। शहर में हजारों लीटर पानी का कारोबार हो रहा है।
निगम के जल संसाधन
ट्यूबवेल - 158,
10 एचपी सबमर्सिबल - 500,
वन एचपी सबमर्सिबल - तीन हजार,
हैंडपंप - 10 हजार ,
225 फीट नीचे पहुंच गया भूगर्भ जल
महानगर ही नहीं बल्कि पूरे जनपद में भूगर्भ जल स्तर लगातार गिर रहा है। सरकारी रिकार्ड के मुताबिक मेरठ जनपद के मेरठ, रोहटा, खरखौदा, जानी, माछरा, परीक्षितगढ़ ब्लॉक डार्क जोन में शामिल हैं। 100 फीट से नीचे पानी जाते ही डार्क जोन घोषित कर दिया जाता है। कई इलाकों में तो 225 फीट तक पानी पहुंच गया है।
जलकल विभाग के आंकड़े
- 2011 की जनगणना के अनुसार शहर की आबादी 15 लाख
- आठ साल में बढ़ी आबादी लगभग पांच लाख
- शहर की जनता के लिए प्रतिदिन पानी की डिमांड- 300 एमएलडी
- गंगाजल, ट्यूबवेल, सबमर्सिबल, हैंडपंप से दिया जा रहा पानी- 315 एमएलडी
- सुबह चार घंटे और शाम को चार घंटे दिया जाता है पानी
इन जलाशयों तक पहुंचा ही नहीं गंगाजल
बच्चा पार्क पर 1200 किलो ली. पानी की क्षमता वाला जलाशय है, जिसे गंगाजल पाइप लाइन से अभी तक जोड़ा ही नहीं गया है। इस काम के लिए 57 लाख रुपये का बजट प्रस्ताव तैयार किया गया है।
- शास्त्रीनगर सेक्टर 12 में 1500 किलो ली. पानी की क्षमता का भूमिगत जलाशय बनाया गया। इसे भी गंगाजल पाइप लाइन से नहीं जोड़ा।
- नौचंदी मैदान में तिरंगा गेट के निकट 1500 किलो ली. क्षमता वाला जलाशय है, यहां भी पानी नहीं पहुंचा।
- गोला कुंआ पर 1500 किलो ली. पानी का भूमिगत जलाशय बनाया गया, यहां भी पानी नहीं आया।
फिरंगियों ने अपने लिए डलवाई थी गंगाजल पाइप लाइन
अंग्रेजी हुकूमत के समय फिरंगियों ने चार एमएलडी गंगाजल की पाइप लाइन अपने पीने के पानी के लिए डलवाई थी। भोले की झाल पर ट्रीटमेंट प्लांट भी लगवाया था। उसे चलाने के लिए गंगनहर पर ही बिजली बनाने के लिए टरबाइन लगवाई थी। भोले की झाल से गंगाजल सीधे पुरानी तहसील कोतवाली पर बनी टंकी तक पहुंचता था। ब्रिटिश काल में अधिकारी सिविल लाइन में रहते थे। कोतवाली से पानी की पाइप लाइन सिविल लाइन के लिए भी डली थी। उसी गंगाजल को अंग्रेज और उनके अधिकारी पीते थे। इस पाइप लाइन का पानी शहर की जनता को नहीं दिया जाता था। बताया जाता है कि देश की आजादी के बाद भोले की झाल पर लगा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट खराब हो गया था। उसके बाद सरकार ने पाइप लाइन को चालू रखने के लिए भोले की झाल पर एक ट्यूबवेल लगा दी। वह ट्यूबवेल अभी भी चलती है। उसका पानी अभी भी शहर में पहुंचता है। लेकिन पाइप लाइन पुरानी होने के कारण और शहर में जल संसाधन बढ़ने के बाद इस पाइप लाइन को शहर में जगह-जगह जल कल विभाग ने काट दिया था। इस लाइन से अभी भी शहर के ईदगाह और कैंचियान आदि इलाकों में गंगाजल की आपूर्ति होती है। प्रेशर बढ़ाने के लिए जरूर ट्यूबवेलों की लाइनों से जोड़ा गया है।
करोड़ों खर्च, खड़ौली की जनता को पानी नहीं
नगर निगम क्षेत्र के गांव खड़ौली में जल निगम ने दस साल पहले ट्यूबवेल का निर्माण कर पाइप लाइन डाली थी। भ्रष्टाचार की इस पाइप लाइन में जब भी पानी छोड़ा जाता है, तभी यह फट जाती है। न तो भ्रष्टाचारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गयी और न जनता के लिए पीने के पानी की व्यवस्था की गयी है।
वर्जन
- शहर में कहीं भी पानी की दिक्कत नहीं है। 2011 की जनगणना के अनुसार 15 लाख की आबादी वाले शहर में 214 एमएलडी पानी की डिमांड है। जबकि अब 315 एमएलडी की जलापूर्ति की जा रही है। कुछ इलाकों में जल निगम ने पाइप लाइन नहीं जोड़ी है। इस कारण जलाशयों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। वहां पर ट्यूबवेलों से आपूर्ति की जा रही है।
- सुनील कुमार, अवर अभियंता जलकल
- शहर में चार स्थानों पर छोटे जलाशयों को गंगाजल पाइप लाइन से नहीं जोड़ा गया है। पाइप लाइन को जगह-जगह जोड़ा जाना बाकी है। इसका नक्शा तैयार कर लिया है। धन की डिमांड की जा रही है। सरकार से धन मिलेगा तो लाइनें जोड़ दी जाएंगी। शहर में 100 एमएलडी गंगाजल आपूर्ति शुरू की जाएगी।
- रमेश चंद्र, परियोजना प्रबंधक जल निगम
इनका ये है कहना
- कंकरखेड़ा के साधु नगर में जलापूर्ति टैंकर से की जा रही है। हैंडपंप भी खराब पड़े हैं। कई बार निगम वाले टैंकर भी नहीं भेजते हैं।
- हेतराम शाक्य
- हैंडपंपों से पीला पानी आ रहा है या खराब पड़े हैं, नए लग नहीं रहे। टंकी लगी है, लेकिन जनता को पानी नहीं मिला।
रेनू सैनी, पार्षद वार्ड 38
- महानगर में गंदे पानी की आपूर्ति की जा रही है। टंकियों की सफाई नहीं की गई है। कई टंकियों में पक्षियों, जानवरों के शव भी मिल चुके हैं।
विपिन जिंदल, पार्षद वार्ड 14
- जलपूर्ति कैसे होगी जब लाखों रुपये खर्च करके बनाए गए भूमिगत जलाशयों तक पानी ही नहीं पहुंच पाया है। जनता परेशान है।
अब्दुल गफ्फार, पार्षद वार्ड 73
- लिसाड़ी गेट क्षेत्र में पाइप लाइन से गंदा पानी आ रहा है। 10 एचपी के सबमर्सिबल लगे हैं। जनता मनमर्जी से चलाती है।
शाहिद अब्बासी, पूर्व पार्षद वार्ड 89
- शहर में जलापूर्ति के लिए प्रशासन को जनसंख्या के अनुरूप मानक तय करना चाहिए। कहीं पर पानी नालियों में बहता है, तो कहीं पहुंच नहीं रहा है।
चैतन्यदेव स्वामी, समाजसेवी
- प्रहलादनगर क्षेत्र में हर घर तक पानी नहीं पहुंच रहा है। सबमर्सिबल वाले इलाकों में 24 घंटे पानी बहता है।
जितेन्द्र पाहवा, पार्षद वार्ड 56
- जागृति विहार क्षेत्र में जलापूर्ति तो सुबह शाम आठ घंटे हो रही है। लेकिन पाइप लाइनों में गंदा पानी आ रहा है।
समीर चौहान, पार्षद वार्ड 14
- शास्त्रीनगर एल ब्लॉक- 2 क्षेत्र में गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है। जनता बीमार हो रही है। अधिकारी सुनते ही नहीं।
राजेश रोहेला, पार्षद वार्ड 61
- मलियाना क्षेत्र में जलापूर्ति अनियमित है। पानी बर्बाद हो रहा है। भूगर्भ जल स्तर गिर रहा है। जागरूक होने की जरूरत है।
परवीन राही, पूर्व पार्षद मलियाना