कैंट बोर्ड मेरठ के पिछले साल हुए चुनाव खारिज हो सकते हैं। पूर्व उपाध्यक्ष राजकुमार गुप्ता के पुत्र अमित गुप्ता ने वोटर लिस्ट में त्रुटी होने के बावजूद चुनाव कराने की बात कहते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट डाली थी, जो बृहस्पतिवार को कोर्ट ने स्वीकार कर ली है।
कोर्ट ने दो सप्ताह के अंदर कैंट बोर्ड से जवाब मांगा है। कैंट बोर्ड चुनाव का परिणाम पिछले साल 18 मई 2015 को घोषित हुआ था जिसमें वार्ड तीन से चुनाव लड़ रहे राजकुमार गुप्ता हार गए थे। इसके बाद उनके बेटे अमित गुप्ता ने हाईकोर्ट में रिट दायर की, जिसमें उन्होंने कैंट बोर्ड द्वारा अधूरी वोटर लिस्ट से चुनाव कराने और इस वोटर लिस्ट में झुग्गी झोपड़ी वालों को शामिल कर वोट डलवाने की बात कही थी।
साथ ही चुनाव को रद्द करने की मांग उठाई। पूर्व उपाध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने बताया कि मंगलवार से लगातार तीन दिन तक बहस चलने के बाद बृहस्पतिवार को कोर्ट ने रिट स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने कैंट बोर्ड से दो सप्ताह के अंदर जवाब देने को कहा है। पूर्व उपाध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने कहा कि चुनाव में कैंट बोर्ड ने नियम 10/3 का पालन नहीं किया। वहीं वोटर लिस्ट में काफी त्रुटि हैं।
पार्षदों की हो सकती है सदस्यता खत्म
कैंट बोर्ड में वार्ड एक से रिनी जैन, वार्ड दो से बुशरा अजमल, वार्ड तीन से बीना वाधवा, वार्ड चार से नीरज राठौर, वार्ड पांच से अनिल जैन, वार्ड छह से मंजू गोयल, वार्ड सात से धर्मेंद्र सोनकर, वार्ड आठ से विपिन सोढ़ी पार्षद हैं। अगर कोर्ट वादी अमित गुप्ता के पक्ष में फैसला करते हुए चुनाव को खारिज कर देता है तो इन सभी की सदस्यता खत्म हो जाएगी।
पचमढ़ी में हो चुके हैं चुनाव खारिज
पचमढ़ी कैंट बोर्ड में पिछले साल इसी मुद्दे को लेकर चुनाव खारिज हुए थे। वहां एक वादी ने हाईकोर्ट में रिट दी थी जिसमें कहा था कि पचमढ़ी कैंट बोर्ड ने वोटर लिस्ट में त्रुटि होने के बाद भी चुनाव कराए है, जो कैंट बोर्ड कानून का उल्लंघन करते हैं। इन्हें खारिज किया जाना चाहिए। इसको लेकर हाईकोर्ट में चली बहस के बाद हाईकोर्ट ने वादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए चुनाव को खारिज कर दिया था। इसके बाद कैंट बोर्ड सुप्रीम कोर्ट गया था। जहां पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी पहलुओं को ध्यान देते हुए हाईकोर्ट के फैसले को सहीं ठहराया था।