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प्रभु स्मरण से बंधन मुक्त हो जाता है मनुष्य : भाव भूषण

Sat, 30 May 2026 06:06 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
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प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान में बोले जैन मुनि
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विधान में 405 परिवारों ने चढ़ाए श्रीफल
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के दसवें दिन श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ और अरहनाथ का विधि-विधान से जलाभिषेक किया। धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ। मुनि 108 भाव भूषण महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि सच्ची श्रद्धा और भगवान के नाम का निरंतर स्मरण मनुष्य को सभी प्रकार के बंधनों से मुक्त करने की शक्ति रखता है।
उन्होंने कहा कि जिनका शरीर लोहे की मजबूत जंजीरों से जकड़ा हो, वे भी यदि प्रभु स्मरण में लीन हो जाएं तो मानसिक और आध्यात्मिक रूप से बंधनों से मुक्ति का अनुभव कर सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान भगवान की प्रतिमा को सौधर्म इंद्र द्वारा पांडुक शिला पर विराजमान करने की परंपरा का निर्वहन किया गया। इसके पश्चात शांतिधारा की बोली आयोजित हुई। शांतिधारा का सौभाग्य जयमाला जैन, संदीप जैन, शशांक जैन, सम्यकित जैन, पवित्र जैन, प्रियांक जैन, अस्मिता जैन, मानसी जैन, मनी जैन और मृदुला जैन को प्राप्त हुआ। बाल ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने महामंत्रों के उच्चारण के बीच शांतिधारा संपन्न कराई।
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भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा के समक्ष सजे भव्य मंडल पर 405 परिवारों ने श्रीफल अर्पित कर धर्मलाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर तीर्थ क्षेत्र समिति के सदस्य एवं विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने बाहर से आए श्रद्धालुओं का माला और मुकुट पहनाकर स्वागत किया। उन्होंने विधान पात्रों तथा विभिन्न स्थानों से पधारे श्रद्धालुओं का अभिनंदन भी किया।
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इस मौके पर जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार, विनय कुमार जैन, रोहित जैन, शशांक जैन, मुकेश कुमार जैन, उमेश जैन, अतुल जैन और सुदर्शन जैन सहित अनेक पदाधिकारियों का सहयोग रहा।
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