उर्वरता क्षमता पहचानने से किसान बढ़ा सकते उत्पादन
मोदीपुरम। मौसम और जलवायु पर कृषि उत्पादन की निर्भरता बहुत अधिक है। मौसम के तत्वों को बदलना या प्रतिबंधित करना असंभव है, लेकिन मृदा गुणों को फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए आवश्यकतानुसार प्रतिबंधित किया जा सकता है। कृष्ण कुमार एसआरएफ (सीनियर रिसर्च फैलोशिप) ने बताया कि मिट्टी में उर्वरता क्षमता का महत्व पहचानने से किसान अपनी उत्पादन को बढ़ा सकते हैं।
मिट्टी की उर्वरता का संरक्षण क्यों आवश्यक हैं
मानव आबादी और शहरीकरण बढ़ने के साथ, बढ़ती जनसंख्या की सेवा के लिए खाद्य उत्पादन में वृद्धि करने की आवश्यकता है। कृषि भूमि का क्षेत्रफल दिन-प्रतिदिन कम हो रहा है और मिट्टी की उर्वरता कम होने के कारण फसल उत्पादकता में भी कमी आ रही हैं। इसलिए मिट्टी की उर्वरता में सुधार करके फसल की उत्पादकता बढ़ाना बहुत आवश्यक हैं।
मिट्टी की उर्वरता घटने के कारण
सबसे महत्वपूर्ण कारण किसानों को उचित ज्ञान की कमी और उसके कारण भूमि का अवैज्ञानिक प्रबंधन है। किसान अक्सर अपने पड़ोसी का खेत देखकर कृषि कार्य करने का निर्णय लेते हैं, जो हमेशा उनके लिए सही नहीं होते हैं। इसलिए वह उत्पादकता की कमी से ग्रस्त रहते हैं। कम उत्पादकता के अनेक कारण हैं।
-मृदा परीक्षण का अभाव
-अत्यधिक जुताई
-फसलों का अवैज्ञानिक चक्रण
-केवल अकार्बनिक उर्वरकों का प्रयोग
-मिट्टी पर रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग
-खराब सिंचाई
मिट्टी की उर्वरता को बेहतर करने के उपाय
फसल उत्पादन के लिए योजना बनाने से पहले सबसे महत्वपूर्ण है मृदा परीक्षण। 3-4 साल में एक बार मृदा परीक्षण अवश्य कराना चाहिए। किसान मृदा परीक्षण रिपोर्ट में की गई सिफारिश के अनुसार फसल नियोजन करें।
यदि मिट्टी का पीएच कम है, तो मिट्टी को सीमित करना आवश्यक है। सीमित करना मिट्टी में कैल्शियम या मैग्नीशियम कार्बोनेट जैसे पोषक तत्वों को डालकर मिट्टी मे पीएच को बढ़ाया जा सकता है।
मिट्टी में लवणता मिट्टी में घुलनशील लवणों की उच्च सांद्रता को इंगित करती है और वह पानी और पोषक तत्वों को मिट्टी से ऊपर जाने में बाधा डालती है। अच्छी गुणवत्ता वाले सिंचाई के पानी से मिट्टी को बाढ़ और लिंचिंग करके लवणता को कम किया जा सकता है।
मिट्टी में सोडिकिटी तब होती है, जब मिट्टी में कैल्शियम या मैग्नीशियम के सापेक्ष उच्च मात्रा में सोडियम होता है और कैल्शियम या मैग्नीशियम युक्त उर्वरकों के डालने से इसे कम किया जा सकता है। मिट्टी की उर्वरता को दो तरीकों से बढ़ाया जा सकता है, पहला मिट्टी के कटाव, लिंचिंग, वाष्पीकरण आदि के माध्यम से पोषक तत्वों के नुकसान को कम करना। दूसरा मिट्टी में कार्बनिक स्रोतों को जोड़ना।
उपजाऊ मिट्टी में निम्नलिखित गुण
-पौधों की वृद्धि और प्रजनन के लिए आवश्यक पौष्टिक पोषक तत्वों और पर्याप्त मात्रा और अनुपात में पानी की आपूर्ति करने की क्षमता।
-विषाक्त पदार्थों की अनुपस्थिति जो पौधों के विकास को रोक सकती है ।
-पर्याप्त जड़ वृद्धि और जल प्रतिधारण के लिए पर्याप्त मिट्टी की गहराई ।
-सूक्ष्मजीवों की एक श्रंखला की उपस्थिति जो पौधों के विकास का समर्थन करती है ।
-संयत्र उपलब्ध रूपों में आवश्यक पौष्टिक पोषक तत्वों की पर्याप्त सांद्रता।
सवाल-जवाब
डॉ. सतेंद्र कुमार खारी
प्रोफेसर उद्यान - नोडल ऑफिसर कृषि तकनीकी सूचना केंद्र, कृषि विवि
प्रश्न- शरद कालीन गन्ने की बुवाई कब करें। लल्लू मनेरा
उत्तर- गन्ने की बुवाई के लिए प्रयोग में की जाने वाले गन्ने की नई फसल का प्रयोग करें तथा अक्टूबर माह में बुवाई की जा सकती है। एक हेक्टेयर के लिए 60-70 क्विंटल बीज की आवश्यकता होती है।
प्रश्न- मूंगफली की बुवाई कब कर सकते हैं। पीपी सिंह, जलवा
उत्तर- मूंगफली की बुवाई का उचित समय जुलाई के प्रथम सप्ताह हैं। एक हेक्टेयर के लिए 80 से 100 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
प्रश्न- चने की बुवाई के लिए अच्छी प्रजाति कौन सी लगाएं। मांगेराम पीपला
उत्तर- चने की अच्छी प्रजाति पूसा 256, प्रगति, गौरव एवं ऊसर भूमि के लिए करनाल चना -1 की बुवाई की जा सकती है।
प्रश्न- आलू की बुवाई कब करें तथा प्रजाति कौन सी लगाएं। जयपाल, शास्त्रीनगर
उत्तर- आलू की बुवाई अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह से लेकर दूसरे सप्ताह तक कर सकते हैं। अगेती किस्म कूफरी अशोका, कूफरी जवाहर, कूफरी बहार, कूफरी लालिमा कुफरी पुखराज मध्य अक्टूबर तक बुवाई कर सकते हैं।
प्रश्न- मटर की बुवाई करनी है कब करें। महकार, जलवा बिजनौर
उत्तर- मटर की बुवाई अक्टूबर माह में कर सकते हैं। मटर अगेती किस्म के लिए 150 किलोग्राम एवं मध्य पचेती के लिए 80-100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है।
प्रश्न- लहसुन की बुवाई का उचित समय बताएं। मूलाराम, देवबंद
उत्तर- लहसुन की बुवाई अक्टूबर माह में कर सकते हैं तथा एक हेक्टेयर के लिए 5 से 6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है।
प्रश्न- ट्यूलिप की खेती कब करें। जिले सिंह, सहारनपुर
उत्तर- ट्यूलिप ठंडी जलवायु का पौधा है। इसकी फसल के लिए 10 से 20 डिग्री सेल्सियस तापक्रम की आवश्यकता होती है। मैदानी क्षेत्रों में ट्यूलिप की बुवाई अक्टूबर माह में की जाती है तथा पहाड़ी क्षेत्रों में अक्टूबर से दिसंबर तक कर सकते हैं।
प्रश्न- आलू के साथ सहफसली के रूप में कौन सी फसल बोए। हरि सिंह, लाड़पुर
उत्तर- आलू की फसल के साथ तीन कतार के बाद राई की फसल बोई जा सकती है, बुवाई के 20 दिन के अंदर घने पौधों को निकालकर लाइन में उनके मध्य आपस की दूरी 15 सेमी कर दें।