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दैनिक रोस्टर के विरोध में उतरे खरखौदा कस्बे के व्यापारी

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खरखौदा। कोविड 19 महामारी के तहत शासन ने चौथे लॉकडाउन के तहत खरखौदा के व्यापारियों के लिए जो दैनिक रोस्टर बनाया है। व्यापारी उसके खिलाफ मुखर हो गए हैं। उन्होंने रोस्टर के तहत प्रतिष्ठान खोले जाने पर दस हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ते की मांग की है।
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खरखौदा के संयुक्त उद्योग व्यापार संघ ने प्रशासन द्वारा जारी रोस्टर को अप्रासंगिक बताते हुए उसका विरोध किया। इसके तहत व्यापार संघ अध्यक्ष राजीव त्यागी के अनुसार सप्ताह में दो दिन सोमवार व बृहस्पतिवार को पूर्ण लॉकडाउन रहता है। बाकी के पांच दिन सुबह सात से शाम पांच बजे तक का समय दिया है। हालांकि रोस्टर के तहत एक व्यापारी को केवल एक दिन का ही समय दिया है। एक दिन में भी मात्र पांच घंटे। इन पांच घंटों में व्यापारी क्या व्यापार करेगा। कहां से बिजली का बिल, दुकान का किराया, परिवार का खर्च कहां से करेगा। वहीं, पिछले 65 दिन से व्यापारी भुखमरी के कगार पर है। वैसे भी एक दिन में उस व्यापारी की दुकान पर बड़ी संख्या में ग्राहक पहुंचेंगे। जिससे बीमारी फैलने का अधिक खतरा है। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि न तो शराब की दुकानों पर कोरोना है और न ही बैंक की लाइन में केवल खतरा व्यापारियों की दुकानों पर ही है। उन्होंनेे मांग की कि यदि रोस्टर के तहत प्रतिष्ठान खोले जाएंगे तो व्यापारियों को खर्चे व अन्य कामकाज के लिए दस हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से गुजारा भत्ता दिया जाए। अन्यथा व्यापारियों को पांच दिन प्रतिष्ठान खोलने की अनुमति दी जाए। व्यापार मंडल ने यह ज्ञापन नगर पंचायत खरखौदा रमेश चंद के माध्यम से एसडीएम के नाम सौंपा है।
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