परतापुर में सोमवार सुबह पॉलीटेक्निक के छात्र को रोडवेज बस ने कुचल दिया। इससे गुस्साए एबीवीपी नेताओं और छात्रों ने दिल्ली रोड पर जाम लगाकर जमकर हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस की उनसे जमकर नोकझोंक हुई। पुलिस ने एबीवीपी नेताओं को हिरासत में ले लिया।
मोदीनगर स्थित गोविंदपुरी निवासी निशांत राठौर (21) पुत्र विनोद राठौर परतापुर स्थित डीएन पॉलीटेक्निक कॉलेज में इलेक्ट्रिकल सेकेंड ईयर का छात्र था। सोमवार सुबह करीब साढे़ आठ बजे वह रोडवेज बस से मोदीनगर से मेरठ आया था। कॉलेज के सामने पीछे से आई एक रोडवेज बस ने उसे कुचल दिया। हादसे के बाद चालक बस लेकर फरार हो गया। इस दौरान वहां छात्रों की भीड़ लग गई। छात्रों के अनुसार उन्होंने निशांत को अस्पताल ले जाने के लिए वहां से गुजर रहे वाहनों को रोकने की कोशिश की, लेकिन किसी ने वाहन नहीं रोका। कॉलेज स्टाफ ने भी अपनी कार देने से मना कर दिया। बाद में किसी तरह एक ऑटो से निशांत को अस्पताल ले गए। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना से गुस्साए कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने कॉलेज के बाहर हंगामा कर जाम लगा दिया। एबीवीपी नेता आशीष गुप्ता, उत्तम सैनी भी वहां पहुंच गए। जाम की सूचना पर सीओ ब्रह्मपुरी धर्मेंद्र चौहान, इंस्पेक्टर सुशील दुबे पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों को समझाया, लेकिन वे डीएम को बुलाने की जिद पर अड़ गए। साथ ही वे कॉलेज शिक्षकों पर भी कार्रवाई की मांग कर रहे थे। बाद में पुलिस ने लाठी फटकार कर छात्रों को वहां से खदेड़कर आधे घंटे बाद जाम खुलवाया। पुलिस ने एबीवीपी नेता आशीष गुप्ता और उत्तम सैनी को हिरासत में ले लिया और थाने ले गई। इंस्पेक्टर परतापुर ने बताया कि मृतक के परिजनों की तहरीर पर बस चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। साथ ही एबीवीपी नेताओं सहित दर्जनों अज्ञात पर जाम लगाने की रिपोर्ट दर्ज की गई है। एबीवीपी नेताओं को जमानत पर छोड़ दिया गया है।
नहीं की किसी ने मदद
छात्रों की मानें तो निशांत की मौत की एक वजह समय पर अस्पताल ना पहुंचना भी है। जाम लगा रहे छात्रों का कहना था कि दुर्घटना के बाद निशांत घायल हालत में सड़क पर तड़पता रहा, लेकिन किसी ने वाहन नहीं रोका। उन्होंने कॉलेज के एक दो शिक्षकों को घटना की जानकारी देकर उनसे अपनी कार देने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने भी कार नहीं दी। इतना सब होने पर 15 मिनट गुजर गए। छात्रों का कहना था यदि उसे समय पर उपचार मिल जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।
इंजीनियर बनना चाहता था
निशांत के पिता विनोद चालक हैं। निशांत की इच्छा इंजीनियर बनने की थी। परिवार भी पूरा सहयोग कर रहा था। निशांत की मौत के बाद उसके छोटे भाई प्रशांत, बहन कृतिका और निलिमा का रो-रोकर बुरा हाल है।