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अवैध हाथों में मुसाफिरों की जिंदगी की स्टीयरिंग 

Tue, 23 Aug 2016 02:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : फाइल फोटो
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आप रोडवेज की बसों में सफर कर रहे हैं तो आपकी जिंदगी की स्टीयरिंग अवैध हाथों हो सकती है। आए दिन परिवहन निगम की खामियों पर उंगली उठाने वाले अनुबंधित बस ऑपरेटरों की बसों को गैर पंजीकृत चालक चला रहे हैं। यह खुलासा आरएम मनोज कुमार पुंडीर द्वारा कराई गई जांच हुआ है। इसमें भैसाली डिपो की अनुबंधित बसों को चला रहे दो अवैध चालक पकड़े गए।
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इसके बाद संबंधित बस मालिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। परिवहन निगम के अफसरों को आशंका है कि सभी अनुबंधित बसों की चेकिंग कराई जाए तो और भी मामले सामने आ सकते हैं।

बसों की कमी के चलते रोडवेज में निजी ऑपरेटरों की बसें अनुबंधित की गई हैं। मेरठ रोडवेज रीजन का भैसाली डिपो 350 अनुबंधित बसों का संचालन करता है। इन पर बस मालिक को ड्राइवर उपलब्ध कराना होता है, जबकि परिचालक परिवहन निगम का होता है। ऑपरेटरों द्वारा बस पर दिए गए चालक का पूरा रिकॉर्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आदि निगम के पास होता है। ड्यूटी स्लिप भी वैध चालक के नाम से ही काटी जाती है।
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लेकिन, बस चालक के बीमार या छुट्टी पर होने की स्थिति में बस ऑपरेटर अवैध (परिवहन निगम में बिना रिकॉर्ड वाले) चालकों को बस पर भेज देते हैं। यह न सिर्फ नियम विरुद्ध है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से भी खिलवाड़ है। लंबे समय से चल रहे इस खेल की सूचना पर आरएम मनोज पुंडीर ने टीम को निरीक्षण के निर्देश दिए। इसमें दो बसों पर वैध चालक की ड्यूटी स्लिप पर अवैध चालक बस संचालित करते पकड़े गए।

ऐसे पकड़ में आया खेल
स्टेशन अधीक्षक चीनी प्रसाद द्वारा आरएम को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक, बस संख्या यूपी-12टी 1375 मेरठ-बागपत रूट पर संचालित थी। बस परिचालक विपिन (कोड नंबर-4094) को बागपत जाने को कहा तो उसने आठ दिन से बस की लाइट नहीं जलने की बात कही।

इस पर बस की ड्यूटी स्लिप चेक की गई तो स्लिप चालक सुहेल के नाम जारी की गई थी और बस पर चालक इकराम तैनात था। दूसरी बस संख्या यूपी-15एटी 6325 मेरठ-मुजफ्फरनगर रूट पर संचालित थी। इस पर तैनात चालक को रूट पर जाने को कहा तो उसने बताया कि परिचालक प्रमोद (कोड संख्या 3915) गेट पर उतर गया है और मैं डीजल डलवाने जा रहा हूं। इस बीच पहुंचे परिचालक प्रमोद से ड्यूटी स्लिप लेकर चेक किया तो स्लिप चालक कृष्ण कुमार के नाम जारी हुई थी और चालक राकेश तैनात था।

हो सकता है बड़ा हादसा
इन बसों को अवैध रूप से चला रहे ड्राइवर के पास लाइसेंस है या नहीं, इसकी भी कोई गारंटी नहीं रहती। इस तरह से बस में सफर कर रहे यात्रियों की जिंदगी भी खतरे में डाली जा रही है। बस टिकट में यात्री का दुर्घटना बीमा तक होता है। अवैध चालक घटना को अंजाम देकर भाग सकता है। ऑपरेटर अपनी बसों को नियमित रूट पर रखने के लालच में वैध चालक के छुट्टी पर जाने के बाद अवैध चालकों से संचालित कराते हैं। सूत्रों का यहां तक कहना है कि ऐसे चालकों को भी बस सौंप दी जाती है, जिनके पास डीएल तक नहीं होता। अनुबंधित बस होने के चलते आरटीओ भी इनकी चेकिंग नहीं करते।

यह गंभीर मामला है। दोषी बस आपरेटरों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। साथ ही पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भी जवाबदेही तय की जाएगी। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -मनोज कुमार पुंडीर, आरएम मेरठ रोडवेज रीजन
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