हाईकोर्ट से लेकर एनजीटी तक मामला जाने और तमाम विरोध के बावजूद भैसाली बस अड्डा बनकर तैयार हो गया है। करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये की लागत से तैयार बस अड्डे को अब लोकार्पण का इंतजार है। हालांकि बस अड्डे से लगातार बसों का संचालन किया जा रहा है। बस अड्डा बनने से नीची हो चुकी जर्जर बिल्डिंग को भी दूसरे चरण में तोड़कर बनाया जाना है। इसके लिए शासन से बजट का इंतजार है।
शहर के बीच आ चुके भैसाली बस अड्डे से मेरठ व भैसाली डिपो की 500 से अधिक बसों का संचालन किया जाता है। बसों की भारी संख्या के चलते शहर में जाम और प्रदूषण की भयावह स्थिति रहती है। बस अड्डे को शहर से बाहर करने के मामले को लेकर हाईकोर्ट और एनजीटी तक वाद पहुंचा, लेकिन वहां से मिले कुछ निर्देशों के बाद रोडवेज ने बस अड्डे का निर्माण करा दिया। फिलहाल बस अड्डा बनकर तैयार है। बचे हुए कार्य को फाइनल टच दिया जा रहा है।
18 प्लेटफार्मों से होगा बसों का संचालन
बस अड्डे पर 18 प्लेटफार्म बनाए गए हैं। इन प्लेटफार्मों से दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, कौशांबी, आनंद विहार, बिजनौर, नजीबाबाद, कोटद्वार, मुजफ्फरनगर, हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, बागपत, बड़ौत, शामली, अजमेर, जयपुर और अलवर आदि जाने वाली बसों का संचालन किया जाएगा। इन सभी बसों के लिए अलग-अलग प्लेटफार्म होंगे। वेटिंग शेड पर सभी प्लेटफार्मों को रिफ्लेक्टर टेप से दर्शाया जाएगा। नियत प्लेटफार्म पर ही बस को खड़ा करना होगा।
वेटिंग शेड में लगाई गई बेंच, बनाया टॉयलेट
बस अड्डे के वेटिंग शेड में यात्रियों को बस का इंतजार करने के लिए बेंच का इंतजाम किया गया है। इसके साथ ही वाटर बूथ व टॉयलेट बनाए गए हैं। पूछताछ के लिए पूछताछ केंद्र और कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से बस अड्डे पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे।