यहां पर पेड़ों की अच्छी बागबानी थी। काफी संख्या में अभी भी यहां पर फलों के पेड़ हैं। सैकड़ों साल पुराना पीपल का पेड़ है। काफी सालों से बंगले में लोगों ने अवैध रूप से कब्जे कर लिए थे।
क्योंकि कैंट की सारी जमीन रक्षा संपदा कार्यालय के अंतर्गत आती है। इसका ओल्ड ग्रांट लीज वाले बंगलों का प्रबंधन भी डीईओ कार्यालय में आता है। ऐसे में इस बंगले को कब्जामुक्त कराने में डीईओ की मुख्य भूमिका रही। इसके बाद सेना के एक अफसर भी क्यूआरटी के साथ यहां कई दिन तक ऑपरेशन में रहे।
लोगों को पीपीएक्ट में बेदखली के बाद भी यहां रह रहे कब्जेदारों को विशेष ऑपरेशन के बाद यहां से निकाल दिया गया। इसके अलावा जो अवैध निर्माण था उसको भी ध्वस्त कर दिया गया है। कुछ काम अभी बाकी है, ऐसे में इसको पूरा कराए जाने के बाद बंगले को सेना के हवाले कर दिया जाएगा। सेना के अफसर बताते हैं कि बंगले का अधिग्रहण करके कब्जे में लेने की प्रक्रिया चल रही है।
बेहद बेशकीमती है जमीन
पांच एकड़ जमीन में बने इस बंगले की जमीन बेहद बेशकीमती है। जिसकी कीमत अरबों रुपये बताई जा रही है। सिटी स्टेशन से सटा हुआ ये बंगला रोड के दोनों तरफ बना हुआ है। ऐसे में इसकी कीमत ओर भी बढ़ जाती है। सेना के अफसर बताते हैं कि कई सालों में इतनी जमीन कब्जा मुक्त कराया जाना बड़ी उपलब्धि है।
चला रहे थे नर्सरी
बंगले में अवैध कब्जा करने वालों ने यहां पर दो नर्सरी चला भी चला रखी थी। इसके अलावा मेन गेट के पास कई दूसरे लोगों ने यहां पर झोपड़ी आदि बनाकर मूर्तियां रख दी थी। बंगले के एक हिस्से की जमीन पर एक कबाड़ी ने भी कब्जा कर रखा था। इसका भी अधिकतर सामान हटवा दिया गया है। अफसरों का कहना है कि सेना की मिल्कियत वाली ऐसी दूसरी जगहों को भी चिन्हित किया जा रहा है।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/