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Meerut News: मेरठ सेंट्रल मार्केट में आज चलेगा बुलडोजर

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शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में लंबे समय से लटकी ध्वस्तीकरण की तलवार अब गिरने वाली है। अभी दो दिन पहले ही वास्तुविद नियोजक पत्र के जरिए नई शमन नीति से व्यापारियों में राहत की उम्मीद जगी थी कि आवास एवं विकास परिषद ने मंगलवार को बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण की तैयारी पूरी कर ली है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद परिषद के अधिशासी अभियंता ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर कार्रवाई के लिए पर्याप्त पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की मांग की है। वहीं ध्वस्तीकरण का ठेका लेने वाली लखनऊ की द रिलायबल एजेंसीज को विशेष मशीनरी के साथ तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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दरअसल सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और आर. महादेवन की खंडपीठ ने आवासीय भवन 661/6 में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाने के मामले में 17 दिसंबर 2024 को ध्वस्तीकरण के आदेश दिए थे। आदेश का पालन न होने पर आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना द्वारा अवमानना याचिका दायर की गई जिस पर कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया। पिछले साल छह अक्तूबर की सुनवाई के बाद 27 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिए कि 6 सप्ताह के भीतर अवैध निर्माणों का ध्वस्तीकरण सुनिश्चित किया जाए। इसी दबाव के चलते आवास विकास ने अब कार्रवाई तेज कर दी है। उल्लेखनीय है कि इस प्रकरण में परिषद के 45 अधिकारियों और 21 व्यापारियों के खिलाफ थाना नौचंदी में एफआईआर भी दर्ज है।



1468 निर्माण जद में, पहले चरण में 31 पर कार्रवाई

आवास विकास के रिकॉर्ड के अनुसार कुल 1468 निर्माण ऐसे हैं जो मूल रूप से आवासीय मानचित्र पर स्वीकृत थे लेकिन वहां शोरूम, कॉम्प्लेक्स और दुकानें तन गई हैं। कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने की मियाद खत्म हो रही है जिसके चलते अधिशासी अभियंता अभिषेक राज ने त्वरित कार्रवाई का खाका खींचा है। उन्होंने लखनऊ की कंपनी को दो हैमर हिल्टी युक्त जेसीबी और दो पोर्कलेन मशीनें लाने को कहा गया है। पहले चरण में उन 31 संपत्तियों को निशाना बनाया जाएगा जो नियमों का उल्लंघन कर खड़ी हैं।
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सियासत और उम्मीदों के बीच फंसा बाजार

सेंट्रल मार्केट का माहौल इस वक्त बेहद तनावपूर्ण है। व्यापारी पिछले कई दिनों से अरोड़ा गारमेंट्स के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे। तीन दिन पहले ही सर्किट हाउस में ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने अधिकारियों और व्यापारियों के साथ बैठक कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की थी जिसमें व्यापारियों को खुद ही अनाधिकृत निर्माण हटाने का सुझाव दिया गया था।

वहीं शनिवार को सपा विधायक अतुल प्रधान ने धरने में पहुंचकर भाजपा सरकार पर हमला बोला और याद दिलाया कि सपा शासन में व्यापारियों की दुकानें नहीं गिरने दी गई थीं। रविवार को जब वास्तुविद नियोजक की ओर से 80 दुकानदारों को शमन के आवेदन का आदेश मिला तो व्यापारियों ने राहत महसूस करते हुए होली खेली थी लेकिन अभी गुलाल का रंग छूटा भी नहीं था कि सोमवार को आए ध्वस्तीकरण के नोटिस ने उन खुशियों को मायूसी में बदल दिया है।



बाजार में खौफ, दुकानें बंद

कार्रवाई के डर से व्यापारियों ने बाजार में 100 से अधिक दुकानों को आनन-फानन में दीवारें, दरवाजे और खिड़कियां लगाकर बंद कर दिया है। व्यापारियों में भारी बेचैनी है क्योंकि अगले सप्ताह ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है और परिषद उससे पहले क्लीन चिट के लिए मौके पर ध्वस्तीकरण की पुख्ता रिपोर्ट तैयार करना चाहता है।
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