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पांच करोड़ की लागत से बनेगी माइक्रोबायोलॉजी और एमबीए की बिल्डिंग

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पांच करोड़ की लागत से बनेगी माइक्रोबायोलॉजी और एमबीए की बिल्डिंग
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय कैंपस में पांच करोड़ रुपये की लागत से माइक्रोबायोलॉजी और एमबीए की बिल्डिंग बनाई जाएगी। इसेे लेकर फाइनेंस कमेटी की बैठक में मुहर लगा दी गई है। विवि प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि दोनों बिल्डिंग बनाए जाने में कोई पेड़ नहीं काटा जाना चाहिए। इसके अलावा कक्ष निरीक्षकों को अब कॉलेजों से भुगतान किए जाने की बजाय विवि सीधे उनके अकाउंट में भेजेगा। इससे कॉलेजों में होने वाला खेल भी खत्म हो जाएगा।
मंगलवार को कैंपस के प्रशासनिक भवन समिति कक्ष में फाइनेंस कमेटी की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में राजा महेंद्र प्रताप लाइब्रेरी के सामने राजा महेंद्र प्रताप की प्रतिमा लगाने के लिए बजट आवंटित किया गया। करीब 20 लाख रुपये की लागत से यह प्रतिमा बनाई जाएगी। इसे लेकर मूर्तिकारों की एक कमेटी भी बनाने का निर्णय लिया गया है। मेडिकल की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पारिश्रमिक 300 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये करने और परीक्षा नियंत्रक व कैंपस के सभी विभागाध्यक्षों को 20 हजार रुपये का वित्त अधिकार, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को कन्वेंस देने का निर्णय लिया गया। एमबीए और माइक्रोबायोलॉजी विभाग का विस्तार किया जाएगा। इन दोनों बिल्डिंग पर करीब ढाई-ढाई करोड़ रुपये खर्च आएगा।
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सबसे अहम फैसला कॉलेजों में कक्ष निरीक्षकों को किए जाने वाले भुगतान को लेकर किया गया है। अभी तक विवि की जो भी परीक्षाएं होती हैं, उनमें कक्ष निरीक्षकों को कॉलेजों द्वारा भुगतान किया जाता है। विवि भुगतान की रकम कॉलेजों को जारी करता था, लेकिन इसेे लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल ही थी कि तमाम कॉलेजों में सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों के शिक्षकों को भुगतान किया ही नहीं जाता है। ऐसे में विवि ने इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया है। अब कक्ष निरीक्षक को विवि सीधे उनके अकाउंट में आरटीजीएस के जरिए भुगतान करेगा। कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में हुई फाइनेंस कमेटी की बैठक में प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला, वित्त नियंत्रक सुशील कुमार गुप्ता, रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अश्वनी कुमार, क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी डॉ. राजीव कुमार शामिल रहे।
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