गांवों के साथ दूरियां घटाएं
वित्तमंत्री का लक्ष्य बहुत कठिन है। इकोनॉमी ठहरी हुई है। पेपर वर्क बहुत बढ़ गया है जो छोटे कारोबारियों के लिए उचित नहीं है। सरकार योजनाएं बनाती हैं लेकिन उनका पालन इस तरह नहीं होता कि उसका लाभ उद्यमियों को मिले। ईज ऑफ डूइंग पर भी संतुष्टिजनक काम नहीं हो रहा। एमएसएमई सेक्टर इसलिए खुश नहीं है। योजनाओं का पालन ठीक से हो और सरकार निवेश पर काम करे। अनुराग अग्रवाल, अध्यक्ष आईआईए मेरठ चैप्टर
स्टार्टअप को बढ़ावा देना जरूरी
बजट में सरकार का ध्येय डूबती अर्थव्यवस्था को सही ट्रैक पर लाने का है तो सरकार को कोई र्नई घोषणा करने की जरूरत नहीं है। पुरानी योजनाओं व घोषणाओं को सही तरीके से लागू कर पालन कराया जाए। जीएसटी की दरों में आए दिन होने वाले बदलावों को खत्म किया जाए। जीएसटी का सरलीकरण हो। स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जाए ताकि रोजगार बढ़े। रोजगार बढ़ेगा तो मांग, खपत भी बढ़ेगी। लोगों के हाथ में रोजगार होगा तो पैसा होगा तो लोग उसे खर्च भी कर पाएंगे। अंकित सिंघल, सचिव आईआईए मेरठ
खेती को मेन्यूफेक्चर सेक्टर से जोड़ें
सरकार को एग्रीकल्चर को मेन्यूफेक्चर सेक्टर से जोड़ना चाहिए। बजट में सरकार को इस दिशा में सोचना चाहिए कि गांवों को शहरों से जोड़ें। गांवों की ओर सरकार को रुख करना होगा तभी अर्थव्यवस्था सुधरेगी। क्योंकि भारत कॉटेज इंडस्ट्री का देश है। लेकिन मंदी के कारण अब कॉटेज इंडस्ट्री बंद हो रही हैं। साथ ही सरकार को स्टोरेज सिस्टम सुधारने होंगे ताकि अनाज खराब न हों और मंदी के वक्त काम आएं। -अनुराग गोयल, एसबीआई से सेवानिवृत्त
आयकर में वृद्धजनों को मिले राहत
बजट में सरकार को वृद्धजनों के लिए विशेष पैकेज की सुविधा देनी चाहिए। गांवों, उद्योगों, शिक्षा के अलावा वृद्धजनों की सहायता भी सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए सरकार वरिष्टजनों को आयकर में विशेष छूट दे। ग्रासरूट लेवल पर काम करने के लिए किसानों को विशेष बाजार व पैकेज सुविधा दी जाए। ताकि गांवों से हमारी इकनोमी समृद्ध होगी। -अशोक अग्रवाल, पीएनबी से सेवानिवृत्त
समय पर पूरे हों विकास के प्रोजेक्ट
बजट में वित्तमंत्री को प्रमुख तौर से लंबित प्रोजेक्ट को समय से पूरा करने की बात पर विचार करना चाहिए। देश में विकास के प्रोजेक्ट बनते हैं, विकास कार्य शुरू होते हैं लेकिन वो कभी भी समय पर पूरे नहीं होते। प्रोजेक्ट लंबित होने के कारण उनकी लागत बढ़ती रहती है इसलिए जो भी विकास के प्रोजेक्ट हो वो समय पर पूरे हो जाएं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ट्रांसपोर्टेशन की अच्छी सुविधा जोड़ी जाए। कॉरपोरेट टैक्स में 5 प्रतिशत की ही कमी की जाए। जीएसटी की दरों को भी 15 प्रतिशत तक सीमित कर देना चाहिए। -एपीएस त्यागी, पीएनबी से सेवानिवृत्त