हल्की ही सही, पर ठंडे पड़े रियल एस्टेट में इस बजट से गर्माहट आएगी। कई घोषणाएं जहां भवन निर्माताओं को राहत दे रही हैं, तो आम उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा। मेरठ में ही दस हजार से ज्यादा आवास ऐसे हैं, जो ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं। पहले नोटबंदी और फिर जीएसटी की मार रियल एस्टेट कारोबार पर इस कदर पड़ी कि इस धंधे की कमर ही टूट गई। कई अहम प्रोजेक्ट बीच में ही अटक गए। शहर में ऐसे तमाम प्रोजेक्ट हैं, जिनमें आवास खाली पडे़ हैं। दस हजार से ज्यादा ऐसे आवास है, जो पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन खरीदार नहीं है। लगभग इतने ही आवास बन रहे हैं। न केवल निजी बिल्डरों, बल्कि आवास विकास एवं एमडीए के भी आवास खाली पड़े हैं। नियमानुसार कंप्लीशन के बाद आवासों पर एक साल के बाद टैक्स लगता है। इस बजट में यह अवधि दो साल की गई है। एक आवासीय मकान से दो आवासीय मकान में पुनर्निवेश तक भी छूट का दायरा बढ़ाया गया है। माना जा रहा है कि इससे भी आवासों में पुनर्निवेश की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित होगा।
तुलनात्मक रूप से है अच्छा
तुलनात्मक तरीके से बजट अच्छा है। विकास के लिए जो धनराशि बढ़ाई है, वह निर्णय सही है। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जरूर पैसा खर्च किया जा रहा है। - कमल ठाकुर, महामंत्री रीयल एस्टेट डेवलपर एसोसिएशन