बिजनौर से बसपा सांसद मलूक नागर ने संसद में पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने का मुद्दा उठाकर इसे फिर से हवा दे दी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की पहले भी मांग उठती रही है। पूर्व मंत्री स्वामी ओमेवश ने गंगा प्रदेश बनाने की मांग को लेकर सात साल तक आंदोलन चलाया था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी किया था। रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह भी हरित प्रदेश बनाने की मांग करते रहे हैं।
बिजनौर लोकसभा के बसपा सांसद मलूक नागर ने मंगलवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग प्रदेश बनाने का मामला जोर शोर से उठाया। उन्होंने छोटे राज्य के फायदे भी बताए। सांसद ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग राज्य बनने से राजस्थान सरकार ने पिछड़ों के साथ जो अन्याय किया है, उसकी भरपाई की जा सकती है।
मलूक नागर के इस मुद्दे को लेकर तमाम कद्दावर नेता एकजुट हो सकते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को लेकर नेता कहते आए हैं कि छोटे राज्य होने से विकास की गंगा बहेगी और खुशहाली होगी। पूर्व मंत्री स्वामी ओमवेश इस मुद्दे को पहले ही उठा चुके हैं।
स्वामी ओमवेश ने 1989 में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने स्वामी ओमवेश ने बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, अलीगढ़, मुरादाबाद, अमरोहा, बंदायू, आगरा, बरेली व शाहजहांपुर समेत 17 जिलों को मिलाकर गंगा प्रदेश बनाने की मांग की थी।
उन्होंने दिल्ली के जंतर मंतर पर इसके लिए प्रदर्शन भी किया था। स्वामी ओमवेश के साथ इस आंदोलन में पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, वीरेंद्र वर्मा, सोहनवीर सिंह समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम नेता शामिल हुए थे। इस मुद्दे पर ये तमाम नेता एकजुट हो गए थे।
स्वामी ओमवेश ने 1996 तक गंगा प्रदेश को अलग राज्य बनाने का आंदोलन चलाया था। बाद में ये मुद्दा दब गया। रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने हरित प्रदेश बनाने की मांग करते हुए 1992 में इस मुद्दे को फिर हवा दी। उन्होंने जोर शोर से अलग प्रदेश बनाने का यह मुद्दा उठाया था। बाद में दो तीन साल बाद इस मुद्दे को दबा दिया गया। अब बसपा सांसद मलूक नागर ने इस मुद्दे को उठाकर फिर से हवा दे दी है।
मायावती ने भी की थी वकालत
बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी एक बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की वकालत की थी। इसके बाद उन्होंने भी इस मुद्दे को फिर नहीं उठाया। मायावती के इस मुद्दे को उठाने के बाद लगा था कि अलग राज्य बनाने का मुद्दा गरमाएगा पर ऐसा नहीं हुआ। अब बसपा सांसद मलूक नागर के इस मुद्दे को उठाने से लगता है कि अब इस पर अन्य दल और नेता भी एकजुट हो सकते हैं।
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