मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय कैंपस में दलालों का गैंग सक्रिय है, जो छात्र-छात्राओं से मार्कशीट में नंबर बढ़वाने जैसे फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा है। छात्र-छात्राएं ऐसे दलालों के संपर्क में आकर ठगी के शिकार हो रहे हैं। बीबीए का एक छात्र भी ऐसे ही ठग का शिकार हो गया। दो हजार रुपये देने के बाद दलाल ने नंबर बंद किया तो उसने मेडिकल पुलिस से शिकायत कर दी। मंगलवार को पुलिस ने विवि के एक कर्मचारी को पकड़कर पूछताछ की तो पदाधिकारियों ने हंगामा कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने कर्मचारी को छोड़ दिया। पूरे मामले में जांच की जा रही है।
मेडिकल पुलिस के मुताबिक अभिषेक यादव बीबीए का छात्र है। उसकी मार्कशीट बनने में समस्या आ रही थी। इसको लेकर उसे कैंपस में विजय ठाकुर नाम का एक दलाल मिला। उसने बताया कि उसकी मार्कशीट विवि के कक्ष संख्या 309 से बननी है। उसने वहां के एक कर्मचारी का नाम भी छात्र को बताया। छात्र से उसने दो हजार रुपये ले लिए। कई दिनों तक भी मार्कशीट नहीं मिलने पर अभिषेक ने विजय ठाकुर को फोन किया तो उसने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। इस पर मंगलवार को अभिषेक ने विवि चौकी पहुंचकर इंचार्ज से शिकायत की तो वे पुलिसकर्मियों के साथ कक्ष संख्या 309 में पहुंच गए। जिस कर्मचारी का नाम अभिषेक ने बताया था उसको पुलिस ने पकड़ लिया।
पूरे मामले की जानकारी होने पर विवि के कर्मचारी एकत्र हो गए। उन्होंने रजिस्ट्रार दफ्तर में जाकर हंगामा कर दिया। कर्मचारियों का कहना था कि पुलिस इस तरह से किसी कर्मचारी को कैसे पकड़ सकती है। कुछ कर्मचारियों ने छात्र से भी कह दिया कि घूस देना अपराध है। तुमने किसी को पैसे कैसे दे दिए। इस पर छात्र डर गया। उसने कोई भी कार्रवाई करने से इंकार कर दिया। पुलिस कर्मचारी को छोड़कर चली गई। सीओ सिविल लाइन संजीव देशवाल का कहना है कि अगर विवि की तरफ से शिकायत की जाएगी तो कार्रवाई की जाएगी।
कुछ तो है मामला
जिस तरह से छात्र को दलाल ने कर्मचारी का नाम बताया उससे भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि इसको लेकर विवि प्रशासन इस बारे में स्पष्ट कर चुका है कि किसी ने भी छात्रों से पैसे मांगकर काम किया तो सीधे सस्पेंड किया जाएगा। घूसखोरी के मामले में कुलपति प्रो. एनके तनेजा दो कर्मचारियों को सस्पेंड भी कर चुके हैं। पूरे मामले में अगर विवि शिकायत करे तो पुलिस दलाल के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल निकालकर पूरे प्रकरण का खुलासा कर सकती है। आरोपी के मोबाइल की कॉल डिटेल से यह भी पता चल जाएगा कि उसकी विवि के किसी कर्मचारी से बात होती है या नहीं।
दलालों की दें सीधे सूचना
रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा का कहना है कि अगर किसी छात्र-छात्रा को कोई समस्या है तो वे उनसे मिलें। नियमानुसार जिसका कार्य होना है, उसे कराया जाएगा। किसी भी दलाल के झांसे में न आएं। वो अगर कोई प्रमाणपत्र देगा तो भी वह फर्जी होंगे। जिससे आगे छात्रों को भी परेशानी हो सकती है।