दोनों आरोपियों को किया गिरफ्तार। सांकेतिक तस्वीर।
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मंगलपांडे नगर स्थित सीजीएसटी कार्यालय में सीबीआई के हत्थे चढ़े अधीक्षक संजय मीना और कम्प्यूटर ऑपरेटर यश शर्मा की गिरफ्तारी के बाद अब चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। शिकायतकर्ता रोहित पाल के मुताबिक ऑपरेटर यश शर्मा भ्रष्टाचार के नशे में इस कदर चूर था कि उसने खुलेआम धमकी दी थी कि चाहे सरकार के पास जाओ या सीबीआई के पास बिना सुविधा शुल्क के फाइल आगे नहीं बढ़ेगी।
कंकरखेड़ा निवासी पीड़ित रोहित पाल अपना एक वेडिंग स्टूडियो चलाते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें विभाग की ओर से एक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। रोहित ने नियम के मुताबिक जरूरी दस्तावेज पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड कर दिए थे लेकिन इसकी भौतिक प्रति जमा करने और केस के निस्तारण के लिए वे कई दिनों से दफ्तर के चक्कर काट रहे थे। इसी मामूली काम के बदले अधीक्षक संजय मीना के इशारे पर ऑपरेटर यश शर्मा 6,000 रुपये की मांग कर रहा था।
पीड़ित रोहित पाल ने कई बार गुहार लगाई कि उनके पास रिश्वत देने के लिए पैसे नहीं हैं और उनका काम नियमानुसार सही है। आरोप है कि जब रोहित ने अधीक्षक संजय मीना से इस बारे में बात की तो उन्होंने भी मदद करने के बजाय पीड़ित को ऑपरेटर के पास ही भेज दिया। अधीक्षक ने दो टूक कहा, जैसा यश शर्मा कह रहा है वैसा ही करो, तभी काम होगा। यानी ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार की सेटिंग फिक्स थी। जब रोहित ने रिश्वत देने से साफ मना किया तो ऑपरेटर यश शर्मा ने बड़ी ढिठाई से धमकी देते हुए कहा, तुम चाहे सीबीआई से कहो या सरकार से, बिना छह हजार रुपये दिए काम नहीं होगा। कर्मचारी की इसी खुली धमकी ने परेशान होकर रोहित सीबीआई के पास गया।
काफी देर की पूछताछ
रोहित की शिकायत पर सीबीआई गाजियाबाद ने तत्काल एक्शन प्लान तैयार किया। जैसे ही बृहस्पतिवार को यश शर्मा और अधीक्षक संजय मीना ने रोहित से रिश्वत की रकम ली, पहले से जाल बिछाए बैठी सीबीआई की टीम ने दोनों को रंगेहाथ दबोच लिया। सीबीआई द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की गहन जांच जारी है। सीबीआई के अधिकारियों ने गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से काफी देर तक पूछताछ की। टीम ने न केवल इस मामले से जुड़े कागजात खंगाले, बल्कि कार्यालय के अन्य संदिग्ध दस्तावेजों की भी गहन जांच-पड़ताल की।