शहर के बाहर अनियोजित तरीके से ऐसा मेरठ विकसित हो रहा है, जिसका विकास आने वाले प्रस्तावाें में अवरोध का काम करेगा। शहर के चार जोन में एमडीए ने इस बाबत अपनी टीमें लगाकर काम शुरू किया है। बावजूद इसके शहर में बीस हजार से ज्यादा ऐसे निर्माण हैं, जो पूरी तरह से मैच्योर हो गए हैं और उन पर सीधा एक्शन लेना अब टेढ़ी खीर होता जा रहा है।
विकास की राह पर अपना शहर आगे बढ़ रहा है। मेट्रो ट्रेन का प्रस्ताव जहां प्रदेश सरकार के पास लंबित हैं, तो वहीं रैपिड ट्रेन की डीपीआर भी केंद्र सरकार यूपी को भेज चुकी है। यह भी केंद्र की प्राथमिकता में आ गया है। इसके अलावा दिल्ली एक्सप्रेस वे मेरठ से दिल्ली के बीच विकास की नई इबारत लिखेगा। इस पर भी काम शुरू होने के अलावा आईटी पार्क, मिनी स्टेडियम जैसे प्रस्ताव शहर के लिए बेहद अहम हैं।
सारा स्वरूप बिगाड़ रहा ये अनियोजित निर्माण
शहर के चारों तरफ लगातार अनियोजित निर्माण चल रहा है। यह अनियमित विकास भविष्य की योजनाओं पर पलीता लगा रहा है। खासतौर से एनएच-58 पर जबरदस्त ढंग से यह निर्माण हो रहा है। कॉलोनियां डेवलप हो रही हैं। परतापुर ओवरब्रिज के इर्द गिर्द इस तरह का तानाबाना बुना गया है। उधर, मोदीपुरम, कंकरखेड़ा आदि में भी इसी तरह की कॉलोनियां फैल रही हैं। रोहटा रोड, बागपत रोड, गढ़ रोड, मवाना रोड, लावड़ रोड़ आदि पर अनाधिकृत कॉलोनियां बन रही हैं।
चार जोन में प्लान एक्शन तैयार
एमडीए ने शहर के चार जोन में बनाए प्लान पर काम भी शुरू कर दिया है। वीसी योगेंद्र यादव ने चारों जोनल प्रभारियों को इस बाबत टारगेट दिया है। कई निर्माण सील किए गए हैं तो कई ध्वस्त। बड़ा सवाल यह है कि शहर के बीच में पुराने निर्माणों के साथ जो नए निर्माण बाहर हो रहे हैं उन्हें कैसे रोका जाए। भीतर के निर्माण तो पुराने हो गए। लेकिन जो नए निर्माण हैं वह तो भविष्य का प्लान बिगाड़ देंगे। मसलन यदि रैपिड ट्रेन आती है तो उसके इर्द गिर्द निर्माण हो चुके हैं, उन्हें तोड़ना ही होगा।
80 निर्माण नहीं किए सील तो नपेंगे
गत दिवस मीटिंग लेकर वीसी ने सभी अवर अभियंताओं का टारगेट फिक्स कर दिया। साफ कहा कि एक सप्ताह में हर अवर अभियंता को कम से कम पांच निर्माण सील करने होेंगे। चार जोन में लगभग अस्सी निर्माण एक सप्ताह में सील करने होंगे। वीसी ने साफ कहा कि यदि ऐसा नहीं किया तो एक्शन होगा।