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मुजफ्फरनगर: गमगीन माहौल में दफनाया सैन्यकर्मी का शव, शहीद का दर्जा देने की मांग को लेकर हंगामा

Thu, 05 Nov 2020 12:18 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क,अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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sainik - फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर के शाहपुर में गांव हरसौली निवासी सैन्य कर्मचारी इमरान का शव बुधवार सुबह गांव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। ग्रामीणों ने सैन्य कर्मचारी को शहीद का दर्जा देने, पीड़ित परिवार को एक करोड़ का मुआवजा और मृतक परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग करते हुए जमकर हंगामा किया। एसडीएम ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिए जाने सहित अन्य मांगे पूरी करने का आश्वासन देकर ग्रामीणों को शांत किया। इसके बाद, सैनिक के शव को गांव के कब्रिस्तान ले जाकर दफना दिया गया।

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क्षेत्र के गांव हरसौली निवासी इमरान सैन्य कर्मचारी था, जिसकी ड्यूटी असोम के छिपोर थाना क्षेत्र के कैंट एरिया में थी। सेना के मेजर एनपी तिवारी टीम के साथ बुधवार सुबह करीब आठ बजे इमरान का शव लेकर मंसूरपुर तिराहे पर पहुंचे।

ग्रामीणों ने इमरान का शव फूलों से सजी ट्रैक्टर-ट्रॉली में रख लिया और हरसौली की ओर चल पड़े। रास्ते में जगह-जगह ग्रामीणों ने मृत सैनिक को श्रद्धांजलि दी। करीब तीन घंटे बाद इमरान का शव गांव हरसौली में उसके घर पहुंचा, जहां परिजनों ने अपने लाल के अंतिम दर्शन किए। 

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इसके बाद शव को गांव स्थित जनता इंटर कॉलेज के प्रांगण में रखा गया। वहां ग्रामीणों ने सेना के मेजर से सैनिक के मौत के कारणों की जानकारी मांगी। मेजर ने मौत के कारणों का जानकारी देने से इंकार कर दिया। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने सैनिक को शहीद का दर्जा दिए जाने और गांव में शहीद के नाम से प्रवेश द्वार बनवाए जाने की मांग की। मांग पूरी होने तक शव को सुपुर्दे-खाक कर दिए जाने से भी इंकार कर दिया गया। वहीं, सैनिक को श्रद्धांजलि देने के लिए मुख्यालय से कोई अफसर या जनप्रतिनिधि के न पहुंचने पर भी रोष व्यक्त किया गया। 

एसडीएम दीपक कुमार व सीओ बुढ़ाना गिरीश चंद्र त्रिपाठी टीम के साथ मौके पर पहुंचे, जिसके बाद भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत, पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, पूर्व मंत्री चौधरी योगराज सिंह, पूर्व एमएलसी चौधरी मुश्ताक और पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान के साथ शव लेकर पहुंचे सूबेदार सुनील ठाकुर व मेजर एनपी सिंह से ग्रामीणों की वार्ता हुई।

वार्ता के बाद एसडीएम दीपक कुमार ने मृत सैनिक के परिवार को ग्रुप इंश्योरेंस सहित 50 लाख की आर्थिक मदद के साथ ही प्रदेश सरकार से भी मदद की संस्तुति किए जाने की घोषणा की। सैनिक की मौत की सेना स्तर पर जांच पूरी होने पर शहीद का दर्जा दिए जाने का भी आश्वासन दिया गया। इसके बाद ही जवान के शव को गांव के कब्रिस्तान ले जाकर सुपुर्दे-खाक किया गया।
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