Meerut News: ब्रह्मपुरी में सौरभ की हत्या उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर कर दी। इस घटना का चश्मदीद न होने की दलील पर गवाहों की गवाही भारी पड़ गई। कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराया। 14 अक्तूबर को सजा सुनाई जाएगी।
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सौरभ का फाइल फोटो व मुस्कान और साहिल
- फोटो : अमर उजाला
सौरभ की हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। बेशक इस वारदात को लेकर लोगों में काफी गुस्सा था। मीडिया की सुर्खियां ही नहीं, सोशल मीडिया पर भी यह मामला अब तक छाया हुआ है। इस केस को न्यायालय में साबित करना आसान नहीं था। पुलिस की जांच और जुटाए गए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों अटूट कड़ियों को अभियोजन पक्ष ने पेश किया। उनकी दलील बचाव पक्ष की चश्मदीद न होने व अन्य दलीलों पर भारी पड़ी। पुलिस ने 54 दिन बाद आरोपपत्र दाखिल किया। लगभग 125 तारीखें लगीं। 22 गवाहों ने बयान दर्ज कराए। 560 दिन बाद दोनों को दोषी करार दिया।
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जानकारी देते अधिवक्ता।
- फोटो : अमर उजाला
कैब चालक अजब सिंह ने बयान दिया कि वारदात को अंजाम देने के बाद मुस्कान और साहिल ने हिमाचल प्रदेश घूमने जाने के लिए ट्रैवल एजेंसी से चार मार्च 2025 को कैब बुक की थी। सफर के दौरान मुस्कान और साहिल सामान्य तरीके से बातें कर रहे थे। उनके चेहरे पर इतनी जघन्य वारदात को अंजाम देने का कोई डर या पछतावा नहीं था। वह होटल में चले जाते थे और चालक खाना खाकर कैब में सो जाता था।
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कोर्ट में सजा सुनाने के बाद कोर्ट से बाहर मीडिया को जानकारी देते सौरभ के अधिवक्ता विजय बहादुर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली, शिमला और कसौल के होटल के मैनेजरों ने सीसीटीवी फुटेज, रजिस्टर एंट्री आदि मुहैया कराते हुए पुष्टि की कि वह वारदात के बाद उनके होटल में ठहरे थे। उस दौरान दोनों के डांस करते हुए वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। जांच अधिकारी (विवेचक) ने अदालत में मेडिकल स्टोर संचालक, ड्रम व सीमेंट विक्रेता के बयान लेकर उनकी कोर्ट में भी गवाही कराई।
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मुस्कान और साहिल की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनियों के नोडल अधिकारियों ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) और टावर लोकेशन रिपोर्ट पेश करते हुए गवाही दी। कहा कि तीन मार्च की रात (हत्या वाले दिन) मुस्कान और साहिल के मोबाइल की लोकेशन ब्रह्मपुरी स्थित उसी मकान में थीं। इसके अलावा सौरभ के दोस्त सौरभ ने साहिल को वारदात की रात सौरभ व मुस्कान के घर जाते देखा था।
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मुस्कान और साहिल की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बचाव पक्ष की दलील...पड़ोसियों ने क्यों नहीं सुनी सौरभ की चीख
सौरभ हत्याकांड के विचारण (ट्रायल) के दौरान बचाव पक्ष की वकील रेखा जैन ने चश्मदीद गवाह न होने की दलील दी और गवाहों से जिरह की। उन्होंने कहा कि वारदात के दौरान आसपास के लोगों को सौरभ की चीखें क्यों नहीं सुनाई दीं। ड्रम बेचने वाले दुकानदार (सैफुद्दीन) से पूछा कि क्या उसने दुकान पर कोई बिल या पक्की रसीद काटी थी। उसकी दुकान का उस दौरान का फुटेज कहां है। वकील ने कहा कि वारदात के कई दिनों बाद किसी ग्राहक के चेहरे को सटीक रूप को कैसे याद रखा जा सकता है।
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सौरभ का फाइल फोटो व मुस्कान और साहिल
- फोटो : अमर उजाला
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर से पूछा गया कि शव अत्यधिक सड़न में था और सीमेंट के अंदर बंद था। ऐसे में क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दिए गए मौत के समय में 24 से 36 घंटे का अंतर संभव है। टेलीकॉम कंपनियों के नोडल अधिकारियों से पूछा कि टावर लोकेशन केवल मोबाइल हैंडसेट का दायरा दर्शाती है न कि यह कि उस वक्त फोन का इस्तेमाल कौन कर रहा था। कैब ड्राइवर और मनाली के होटल मैनेजरों से पूछा कि क्या दोनों आरोपियों के हाव-भाव में कोई घबराहट, हड़बड़ाहट या कपड़ों पर खून-चोट के निशान थे। नहीं थे तो वह कैसे वारदात करते हैं।
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सौरभ हत्याकांड, साहिल-मुस्कान
- फोटो : अमर उजाला
सौरभ के कमरे के फर्श, दीवार और बेड पर बिखरे थे खून के छींटे
सौरभ को रास्ते से हटाने के लिए मुस्कान और साहिल ने हत्या और खुद को बचाने के लिए शव ठिकाने लगाने की घिनौनी साजिश रची थी। उन्होंने चाकू और उस्तरे से वारकर उसकी गर्दन व कलाइंया धड़ से अलग कर दीं थीं। दोनों पहले एक बड़ी अटैची में शव के टुकड़े रखकर ठिकाने लगाना चाहते थे लेकिन इसमें कामयाब नहीं होने पर आरोपियों ने नीले ड्रम में शव को छिपाया दिया था। डीजीसी कृष्ण कुमार चौबे ने बताया कि कोर्ट में गवाहों के बयान में सामने आया कि आरोपियों ने साजिश रची थी कि वह हत्या के बाद शव को ठिकाने लगा देंगे। इसके बाद वह सभी से कह देंगे कि सौरभ वापस लंदन लौट गया है। अटैची में शव को ठीक से रखने की आशंका पर उन्होंने बाद में ड्रम में शव छिपाने की साजिश रची थी।
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कोर्ट में सजा सुनाने के बाद कोर्ट से बाहर आकर मीडिया को जानकारी देती मृतक सौरभ की मां व साथ में भाई
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ब्रह्मपुरी थाने के विवेचक निरीक्षक रमाकांत पचौरी और उपनिरीक्षक उपेंद्र कुमार को दिए गए बयानों में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल किया था। आरोपियों ने उन्हें बताया था कि लंदन से लौटने के बाद सौरभ उनके संबंधों में बाधा बन गया था। इसलिए उन्होंने उसे रास्ते से हटाने के लिए उसकी हत्या की थी। आरोपियों ने पहले उस्तरे व चाकू से सौरभ के सिर को धड़ से पूरी तरह अलग किया। फिर दोनों हाथों की कलाइयों को काट दिया। शव की दुर्गंध रोकने के लिए उन्होंने बाजार से बड़ा नीला प्लास्टिक का ड्रम, सीमेंट, बालू और डस्ट खरीदकर लाए। इसमें शव के कटे टुकड़ों को पॉलीथीन में लपेटकर रखा और ऊपर से सीमेंट व डस्ट का घोल डालकर सील कर दिया।
चारों ओर से कटी थी गर्दन, शॉक और अत्यधिक रक्तश्राव से हुई मौत
सौरभ के शव का पोस्टमार्टम करने वाले वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दिनेश सिंह चौहान ने अपने बयान में अदालत को बताया कि सौरभ की मृत्यु का कारण गर्दन और शरीर पर धारदार हथियार से किए गए गहरे वार थे। सदमा (शॉक) और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हुई थी। मृतक की गर्दन चारों तरफ से कटी हुई थी। इससे सांस की नली, मांसपेशियां और मुख्य रक्त वाहिकाएं कटने से सिर धड़ से अलग हो गया था। दोनों कलाइयां भी अलग कटी हुई थीं। हालांकि शव अत्यधिक सड़न (एडवांस स्टेज ऑफ डिकम्पोज़िशन) की स्थिति में था। सीमेंट, बालू और डस्ट के भारी घेरे में जमा होने के कारण उस पर बाहरी कीड़े नहीं पड़े थे। इसके अलावा, बाहर से सड़ने के बावजूद शरीर के अंदरूनी कोमल अंग जैसे लिवर, गुर्दे और आंतें अपनी स्वाभाविक व पहचान योग्य स्थिति में थे। पेट में कोई ठोस भोजन नहीं मिला था। केवल 100 मिलीलीटर अर्ध-तरल पदार्थ ही मौजूद था।