खरखौदा। अवैध मीट का कारोबार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सरकारी फाइलों में ही कारोबार को बंद बताया जा रहा है। हालांकि अभी कई फैक्टरियां ऐसी संचालित हैं, जिनके एमडीए से मानचित्र स्वीकृत नहीं हैं।
मेरठ-हापुड़ रोड करीब 15 वर्षों से मीट की बड़ी मंडी बनी हुई थी। प्रदेश में भाजपा सरकार आई तो अवैध मीट के कारोबारियों पर शिकंजा कसा गया। हालांकि इन्होंने पशुपालन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत अन्य विभागों ने एनओसी ले रखी थी। जांच में एमडीए से मानिचत्र पास नहीं होने पर इन फैक्टरियों को घेरा गया। यहां करीब दो दर्जन से अधिक फैक्टरियां मीट के कारोबार से जुड़ी थीं। कई फैक्टरियां कटिंग, रैंडरिंग व अन्य व्यवसाय से जुड़ी थीं। एमडीए ने इन सभी को सील कर दिया था। एमडीए द्वारा सील लगाने के कुछ समय बाद ये फैक्टरियां धड़ल्ले से चलने लगीं। अब कई फैक्टरियों के पास एमडीए से मानचित्र पास है। जिनके पास नहीं हैं उन्हें एमडीए ने सील कर दिया है। हालांकि कई फैक्टरी मालिकों का आरोप है कि राजनीति से जुडे़ कई लोगों की फैक्टरी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। उधर, एमडीए बिना मानचित्र वाली सभी फैक्टरियों पर सील लगाने का दावा कर रहा है। हालांकि अभी दो रैंडरिंग प्लांट, एक दवा कपंनी संचालित की जा रही हैं। इनमें पशुओं की हड्डियों से चर्बी निकालकर मुर्गी दाना तैयार किया जाता है। वहीं, दवा कंपनी पशुओं के खून एवं अवशेषों से कुत्तों के बिस्किट तथा अन्य सामान तैयार कर रही है। इनके पास भी एमडीए का मानचित्र पास नहीं है। इसके बावजूद इन्हें नहीं सील किया गया।
सभी अवैध फैक्टरी सील कर दी गई हैं। दवा कंपनी का संचालन बंद है। उसे यहां ये शिफ्ट किया जा रहा है। हालांकि दो रैंडरिंग प्लांट चल रहे हैं। इनकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। -धीरज सिंह, जोनल अधिकारी मेरठ विकास प्राधिकरण।