पश्चिमी उप्र में ‘सब ठीक’ बताने की तैयारी में जुटी भाजपा
मेरठ। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत के काफिले पर अलवर में हमले के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के समीकरण बदल सकते हैं। वेस्ट यूपी के पांच उन जिलों में पहले चरण में चुनाव है, जहां बीते चार महीने से किसान आंदोलन का ज्यादा प्रभाव दिखा है। रविवार को गाजीपुर बॉर्डर पर हमले को लेकर पंचायत बुलाई गई है। इसमें कृषि कानूनों का विरोध तेज करने का फैसला संभावित है। विपक्ष इसमें अपना राजनीतिक फायदा देख रहा है। इसके मद्देनजर उसने एजेंडा बना लिया है। दूसरी ओर घटना के बाद अंदरूनी तौर पर चिंतित भाजपा खुले तौर पर ‘सब ठीक’ बताने की तैयारी में जुट गई है।
पश्चिमी यूपी का किसान और जाट समुदाय खेती-बाड़ी के मामलों में अपनी आवाज उठाने के लिए भाकियू के साथ है, जबकि राजनीतिक दलों को समर्थन में उनमें एक राय नहीं है। हालांकि भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत कह चुके हैं कि संगठन का चुनाव से लेना-देना नहीं है। पंचायत चुनाव में मतदाता अपनी पसंद के प्रत्याशी को वोट करें। फिर भी रालोद और सपा के साथ-साथ कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी भाकियू कार्यकर्ताओं से अपने पक्ष में मतदान की उम्मीद पाले हैं।
पिछले कुछ समय से जाट बिरादरी या तो भाजपा के विरोध में खुलकर आ गई या फिर भाजपा से उसका जुड़ाव गहरा हो गया है। ऐसे में भाजपा ने जहां जाटों के अलावा अन्य जाति के किसानों को साधने की पूरी योजना बना ली है, वहीं विपक्ष कृषि कानून और किसान आंदोलन के साथ-साथ महंगाई और बेरोजगारी को जोर-शोर से उठाना तय कर चुकी है। रालोद, सपा और कांग्रेस के अलावा बसपा और आसपा ने जाट और अन्य जातियों के अलावा मुसलमानों का गठजोड़ बनाने के लिए मुसलमान उम्मीदवारों को तरजीह दी है। भाजपा इसे ध्रुवीकरण से बदलना चाहती है।
यही नहीं, भाजपा पहले चरण के चुनाव में शामिल पश्चिम के जिलों में मतदान तक ऐसा माहौल बनाना चाहती है, जिसका प्रभाव पूर्वांचल तक पहुंचे। भाजपा नहीं चाहती कि किसान आंदोलन उसके लिए चुनावी चुनौती बने। इसके लिए पश्चिम यूपी में मंत्रियों और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों के ताबड़तोड़ दौरे सोमवार से शुरू हो सकते हैं। दरअसल, भाजपा पंचायत चुनाव के बाद ब्लॉकों और जिला पंचायत में दबदबा कायम कर 2022 के विधानसभा चुनाव की राह आसान करना चाहती है। ------
पश्चिमी यूपी भाजपा के निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष
मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, बिजनौर, हापुड़, गाजियाबाद, अमरोहा और मुरादाबाद
नेताओं के दावे
‘दिल्ली मॉडल’ का प्रचार करेंगे मंत्री-विधायक
दिल्ली सरकार के मंत्री और विधायक पार्टी प्रत्याशियों के लिए प्रचार करेंगे। हम यूपी के लोगों को ‘दिल्ली मॉडल’ की जानकारी ही नहीं देंगे, भरोसा देंगे कि 2022 के बाद यूपी में भी ऐसा ही होगा।
- सभाजीत सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, आप
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कृषि कानूनों से वेस्ट यूपी का नुकसान नहीं
किसान आंदोलन चुनिंदा लोगों का जमावड़ा है। पश्चिमी उप्र में गन्ने की पैदावार ज्यादा होती है और हम किसानों को बताने में सफल रहे हैं कि कृषि कानूनों से उनका कोई नुकसान नहीं होने वाला।
- मोहित बेनीवाल, क्षेत्रीय अध्यक्ष, भाजपा
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आम आदमी की उम्मीद भरी निगाह कांग्रेस पर
न्याय पंचायत स्तर तक सक्रिय हमारे कार्यकर्ता आम लोगों की समस्याओं का समाधान लेकर मतदाताओं के बीच जाएंगे। भाजपा शासन से त्रस्त मतदाता कांग्रेस की ओर बड़ी उम्मीद से देख रहा है।
- पंकज मलिक, प्रदेश उपाध्यक्ष, कांग्रेस
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बसपा ने हर स्तर पर किसानों का साथ दिया
माहौल भाजपा के खिलाफ है। बसपा अध्यक्ष मायावती ने किसान आंदोलन का समर्थन किया है। भाजपा की मनमानी झेल रहे लोग बसपा के शासनकाल में कानून-व्यवस्था को अभी भी भूले नहीं हैं।
- शमशुद्दीन राईन, पश्चिमी उप्र प्रभारी, बसपा