विपक्षी दलों का अरोप : धारा 144 की आड़ में भाजपा कर रही उत्पीड़न, 27 को धरना-प्रदर्शन का ऐलान
मेरठ। भाजपा सरकार लोगों का उत्पीड़न कर रही है। लोगों को उनकी आवाज नहीं उठाने दी जा रही। गन्ना किसानों का 500 करोड़ से ज्यादा बकाया है। बिजली के बिल बढ़ा दिए गए हैं। लोग विरोध प्रदर्शन करना चाहते हैं, लेकिन धारा 144 के नाम पर अनुमति नहीं दी जा रही है। इसके विरोध में 27 जनवरी को मुख्यमंत्री के आगमन के समय बिना अनुमति कमिश्नरी पार्क में धरना प्रदर्शन किया जाएगा। ये बात मंगलवार को रालोद, सपा और कांग्रेस पार्टी की तरफ से संयुक्त रूप से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीनों दलों के नेताओं ने कही।
बाउंड्री रोड स्थित होटल क्रिस्टल पैलेस में आयोजित प्रेसवार्ता में रालोद के जिलाध्यक्ष राहुल देव, सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह और कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अवनीश काजला ने कहा कि एक तरफ जहां भाजपा के नेता जगह-जगह जाकर रैली कर रहे हैं वहीं, दूसरे दलों को लोगों की समस्या भी नहीं उठाने दिया जा रहा है। प्रदेश में अखिलेश यादव, जयंत चौधरी, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी को बवाल में मारे गए पीड़ितों के परिवारों से मिलने से रोका गया। इससे भला क्या माहौल बिगड़ सकता था। नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार लोगों में डर का माहौल पैदा कर रही है। सीएए का पूरे देश भर में विरोध हो रहा है। रालोद नेताओं ने कहा कि मथुरा में किसान गांधीवादी तरह से अपनी समस्याओं को लेकर धरना देना चाहते थे, लेकिन वहां के डीएम और एसएसपी ने धारा 144 का हवाला देते हुए उनको अनुमति नहीं दी। यह पूरी तरह से धारा 144 का दुरुपयोग है। इसके विरोध में सभी दल मिलकर 27 जनवरी को कमिश्नरी पर चौधरी चरण सिंह पार्क में धरना प्रदर्शन करेंगे। नेताओं ने कहा कानून सभी के लिए एक समान है। सत्ता पक्ष कानून का दुरुपयोग कर रहा है।
प्रेस कांफ्रेंस में रालोद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. मेराजुद्दीन, प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. राजकुमार सांगवान, क्षेत्रीय अध्यक्ष यशवीर सिंह, युवा लोकदल के प्रदेश प्रवक्ता सुनील रोहटा, पूर्व विधायक परवेज हलीम, ,कर्नल ब्रह्मपाल तोमर, पूर्व विधायक परवेज़ हलीम, नरेंद खजूरी, ऐनुद्दीन शाह, कमलजीत सिंह, सतपाल तोमर, सुबोध त्यागी, कांग्रेस से हाहिद अंसारी एवं शेरा जाट आदि मौजूद रहे।
प्रशासन के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की तैयारी
रालोद नेताओं ने बताया कि मथुरा में जिस तरह से किसानों की समस्याओं को लेकर शांतिपूर्ण धरने को भी अनुमति नहीं दी गई यह सीधे-सीधे तौर पर शोषण है। डॉ. राजकुमार सांगवान ने बताया कि इसको लेकर वह हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले हैं।