समर्थकों के साथ सपा प्रत्याशी नईमुल हसन
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा ने नहटौर के विधायक ओम कुमार, नगीना के सांसद डा.यशवंत सिंह, पूर्व आईएएस अधिकारी आर के सिंह और उनकी पत्नी पूर्व राज्य मंत्री ओमवती समेत कई दलित नेताओं को दलितों के बीच उतार रखा था। पर ये नेता दलितों को साधने में कामयाब नहीं हुए। दलित पहले से ही भाजपा से आरक्षण के मुद्दे पर नाराज थे। चुनाव के दौरान चली इस अफवाह का भी भाजपा को नुकसान हुआ कि भाजपा आरक्षण खत्म करना चाहती है। भाजपा नेता सक्रिय तो रहे लेकिन इस अफवाह का प्रभावी काट नहीं कर सके। जाट व दलित वोट का बंटवारा हुआ। काफी वोट सपा प्रत्याशी नईमुल हसन की ओर चला गया।
सैनी बिरादरी पर भी थी सपा की नजर
उपचुनाव में सैनी बिरादरी के वोटों पर भी गठबंधन के नेताओं की नजर थी। सपा ने सैनी बिरादरी के नेता मदनलाल सैनी को सैनी बिरादरी में उतार दिया। सपा ने आखिरी समय में महान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशवदेव मौर्य की राजा का ताजपुर में सभा कराकर दांव खेल दिया। सैनियों का कुछ वोट भी सपा की ओर खिसक गया। भाजपा का कट्टर वोट समझने वाले ठाकुरों में भी गठबंधन के नेताओं ने सेंध लगा दी। ठाकुरों का भी कुछ वोट सपा प्रत्याशी की ओर चला गया। चुनाव के दौरान भाजपा के नेताओं ने जमीनी स्तर पर काम नहीं किया, केवल हवा हवाई ही करते नजर आए। इन नेताओं की वजह से ही भाजपा को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा। कई नेता तो ऐसे रहे जो चुनाव में केवल चेहरा दिखाने और अखबारों में खबरें छपवाने तक सीमित रहे। कुछ प्रेस कांफ्रेंस करके ही वापस हो गए।
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