भाजपा कार्यकारिणी की बैठक में शामिल गणमान्य
- फोटो : अमर उजाला
पहले सत्र में खुलकर मंच से संबोधन हुआ। लेकिन दूसरे सत्र में गोपनीय मंत्र दिए गए। इस सत्र में पार्टी के उन खास एजेंडों एवं चिंताओं पर बात की गई जो खास तौर पर चुनाव 2019 के लिए चिह्नित की गई हैं। दरअसल, इस समय भाजपा की सबसे बड़ी चिंता महागठबंधन है। इस बैठक में भी यह मुद्दा हावी रहा। दूसरे सत्र की गहन समीक्षा में सभी की तैयारियाें में अलग-अलग क्षेत्रों के पदाधिकारियों से बात की गई। जोर चूंकि यूपी पर ज्यादा है तो ऐसे में पश्चिम क्षेत्र, अवध और ब्रज के साथ गोरखपुर क्षेत्र के पदाधिकारियों को लक्ष्य दिए गए।
बंद कमरे में तय हुई कार्ययोजना
भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक से ठीक पहले शनिवार को एक होटल में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडे की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश महामंत्री सुनील बंसल ने कार्यसमिति की बैठक में रखे जाने वाले प्रस्तावों को प्रस्तुत किया। हर बिंदु पर उन्होंने कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और सदस्यों से रायशुमारी की। कार्यकारिणी पदाधिकारियों ने भी सुझाव दिए।
प्रदेश अध्यक्ष ने अपने भाषण में चौधरी चरण सिंह का जिक्र करते हुए तारीफ की। उन्होंने कहा कि किसानों-गरीबों के लिए जितना काम सरदार पटेल और चौधरी चरण सिंह ने किया, उतना कोई भी सरकार नहीं कर पाईं।
फूंक फूंककर तलाश रहे सारे कारण
गोरखपुर, फूलपुर, कैराना और नूरपुर के चुनाव की हार के बाद अब भाजपा फूंक फूंक कर कदम उठा रही है। महागठबंधन से बड़ा खतरा है। यदि यह महागठबंधन हुआ तो इसमें शामिल कांग्रेस का पारंपरिक वोट रहेगा। इसके अलावा बसपा के कैडर दलित वोट को काटना आसान नहीं। दलित राष्ट्रपति कार्ड खेलने के बाद से लेकर एससी एसटी एक्ट में संशोधन विधेयक तक भाजपा यह दांव खेल रहे हैं। लेकिन अभी तक यह भरोसा नहीं हो पाया है कि दलित बड़ी संख्या में भाजपा के साथ खड़े हो जाएंगे। सपा का यादवों व मुस्लिमों पर तगड़ा असर है तो रालोद का जाटों पर। ऐसे में भाजपा के लिए यह चुनाव किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं। बस इसी परीक्षा से पार पाने का मंथन इस बैठक में हुआ।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/