प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के बाद भाजपा में अब महानगर और जिला कार्यकारिणी में शामिल होने की होड़ शुरू हो गई है। कार्यकारिणी के दावेदारों ने जिलाध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष से लेकर जनप्रतिनिधियों की परिक्रमा तेज कर दी है। जनवरी महीने में ही कार्यकारिणी पदाधिकारी घोषित होने की संभावना है। पार्टी कार्यकर्ताओं की पीड़ा का संज्ञान लेकर अब खाली पड़े राज्य सरकार के आयोग व बोर्डों में उन्हें समायोजित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
लगभग एक साल की प्रतीक्षा के बाद भाजपा को हरवीर पाल के रूप में नया जिलाध्यक्ष मिल गया। पंकज चौधरी के रूप में नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने के बाद अब जिला व महानगर कार्यकारिणी गठित करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
कार्यकारिणी में पदाधिकारी बनने के लिए भाजपा नेताओं में होड़ शुरू हो गई है। अब दावेदार जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष और जनप्रतिनिधियों के दरबार में परिक्रमा कर रहे हैं। कई दावेदार तो सीधे लखनऊ से ही संपर्क साध रहे हैं। इसमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के मेरठ में समधियाने को भी भुनाने की तैयारी है।
प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के मेरठ में एबीवीपी के संगठन मंत्री का दायित्व संभालने के दिनों के संबंध भी ताजे किए जा रहे हैं। भाजपा के विधायक और सांसद भी अपने समर्थकों को जिला व महानगर कार्यकारिणी में शामिल कराने के लिए पार्टी संगठन पर दबाव बनाने लगे हैं। अभी जनवरी के आखिरी तक कार्यकारिणी गठित होने की संभावना है।
आयोग व बोर्डों के गठन की प्रक्रिया शुरू
प्रदेश में लगभग नौ साल से भाजपा की सरकार होने के बाद भी कई आयोग व बोर्ड खाली पड़े हैं। इसी तरह से नगर निगम में भी पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को पार्षद मनोनीत नहीं करा पाई। भाजपा कार्यकर्ताओं की पीड़ा है कि सरकार द्वारा उन्हें समायोजित नहीं किया जा रहा है।