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भाजपा और मेयर खेमे ने अब तक नहीं खोले पत्ते

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भाजपा और मेयर खेमे ने अब तक नहीं खोले पत्ते
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मेरठ। नगर निगम कार्यकारिणी के छह सदस्यों के चुनाव में एक दिन शेष बचा है लेकिन अभी तक भाजपा और मेयर खेेमे ने प्रत्याशियों के नाम तय नहीं किए हैं। मौजूदा समीकरण के आधार पर दोनों खेमे तीन-तीन सदस्य ही निर्वाचित करा सकते हैं लेकिन ऐन वक्त पर रणनीति कारगर रहने पर इसमें बदलाव भी हो सकता है।
भाजपा ने चुनाव के लिए बुधवार को बैठक बुलाई थी लेकिन पूर्व महानगर अध्यक्ष कृष्ण गोपाल का निधन होने के कारण बैठक स्थगित कर दी गई। बृहस्पतिवार को भी बैठक नहीं हुई। शुक्रवार को प्रत्याशी तय कर मैदान में उतारना और फिर इनके लिए पार्षदों से संपर्क साधकर जीतना आसान नजर नहीं आ रहा है। दूसरी ओर सपा में शामिल होने के बाद महापौर सुनीता वर्मा सर्वदलीय पार्षद खेमे के पार्षदों के साथ बैठक कर चुनाव में उतरने वाले सदस्यों के बारे में चर्चा कर चुकी हैं। हालांकि उनकी ओर से यह नहीं बताया गया है कि वह तीन सदस्य लड़ाएंगे या चार। यदि चार सदस्य में उतारे गए तो चुनाव होगा।
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पिछली बार हुए चुनाव में 12 सदस्यों में से पांच भाजपा और सात महापौर खेमे से चुने गए थे। इसके चलते डिप्टी मेयर के चुनाव में भाजपा को मात मिली थी। नियमों के तहत छह सदस्य कार्यकारिणी से बाहर हो चुके हैं। कार्यकारिणी में अब तीन भाजपा और तीन महापौर खेमे के सदस्य हैं। अब छह पदों के लिए चुनाव होना है। पदेन सदस्यों के वोट बढ़ने के कारण भाजपा पहले से बेहतर स्थिति में तो है लेकिन डिप्टी मेयर पद पर बहुमत के लिए अपने बूते कार्यकारिणी सदस्य जिताने के हालात नहीं हैं।
चुनाव में 88 पार्षदों के साथ ही आठ पदेन सदस्य जिनमें एक सांसद, दो राज्यसभा सदस्य, तीन विधायक और दो एमएलसी वोट डालेंगे। इनमें शहर विधायक सपा से रफीक अंसारी और बसपा एमएलसी अतर सिंह राव भाजपा से अलग हैं। भाजपा के 40 पार्षद हैं। छह पदेन सदस्य मिलाकर यह संख्या 46 होती है। दूसरी ओर विपक्षी खेमे की पदेन सदस्यों समेत कुल संख्या 51 है। देखने में गैर भाजपाई खेमा देखने में इस बार भी मजबूत नजर आता है। हालांकि हाल के दिनों में बदले सियासी हालात में मामला फंसता नजर आ रहा है। दरअसल, गैरभाजपाई पार्षदों में 18 अभी बसपा के हैं। महापौर सुनीता वर्मा बसपा से निलंबित होने के बाद निर्दलीय हो गई थीं। बावजूद इसके बसपा पार्षद उनसे जुड़े हुए थे। अब वह खुद सपा में शामिल होने के साथ ही बसपा के एक दर्जन पार्षद अपने साथ ले जाकर बसपा को कमजोर कर चुकी हैं। ऐसे में बसपा नेतृत्व इसका बदला लेने की सोच ले तो आश्चर्य नहीं होगा।
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भाजपा की निगाह बसपा पार्षदों पर
एक सदस्य के निर्वाचन के लिए 15 वोट की जरूरत होगी। वर्तमान स्थिति में भाजपा और महापौर खेमा दोनाें बराबर हैं। दोनों ही तीन-तीन सदस्य निर्वाचित करा सकेंगे लेकिन पहले से मौजूद छह सदस्यों में भी दोनाें गुटों के तीन-तीन सदस्य हैं। ऐसे में दोनों की संख्या छह-छह हो जाएगी। तब महापौर का वोट निर्णायक होगा। ऐसे में महापौर खेमा अपना डिप्टी मेयर निर्वाचित कराने में कामयाब हो जाएगा। कार्यकारिणी में अपने चार सदस्य निर्वाचित कराने के लिए भाजपा की निगाह बसपा पार्षदों पर है।
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