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बिल्डर ने बदले एनआरआई खातों से 125 करोड़ से ज्यादा के नोट   

Sun, 31 Dec 2017 12:18 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बिल्डर संजीव मित्तल के यहां से बरामद 25 करोड़ की पुरानी करेंसी में नया खेल सामने आ रहा है। उसकी डायरी से कई राज उजागर हुए हैं। यह सारी संपत्ति इसकी अपनी नहीं थी, बल्कि संजीव नोट बदलने की दलाली से जुड़ा था। ये करेंसी मेरठ के अलावा अन्य शहरों के भी लोगों से बदलने के लिए आयी हुई थी। क्योंकि नोटबंदी के बाद एनआरआई खातों से हवाला के जरिये संजीव मित्तल 125 करोड़ रुपये से ज्यादा की पुरानी करेंसी बदलवा चुका था। लेकिन जब वहां पर भी भारतीय पुराने नोट प्रतिबंधित हो गए तो यह 25 करोड़ की पुरानी करेंसी अटक गई, जिसको बदलने के लिए संजीव रात-दिन लगा हुआ था। 
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संजीव मित्तल के यहां से प्राप्त अभिलेखों से कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले जानकारियां मिल रही हैं। सूत्रों की मानें तो उसके यहां से मिली डायरी और फाइलों की जांच में अब तक जो सामने आ रहा है, उसके अनुसार संजीव मित्तल की भूमिका बिल्डर कम बिचौलिए की ज्यादा रही। सन 2009 में वह शहर के एक नामी प्रकाशक से जुड़ा और उसके बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के लिए प्रॉपर्टी की सौदेबाजी करने लगा। इस दौरान उसने कुछ प्रोजेक्ट में अपनी साझेदारी भी की। लेकिन वह जमीन खरीदने में ज्यादातर बिचौलिये की भूमिका ही निभाता रहा। 

यहां से शुरू हुआ हवाला कारोबार 
सूत्रों के अनुसार इस पब्लिकेशन हाउस के मालिक का विदेशों में अच्छा संपर्क है। इसी के माध्यम से संजीव हवाला कारोबार से जुड़ गया। जब नोट बंदी हुई तो संजीव मित्तल ने नोट बदलवाने का काम शुरू कर दिया। बताया जाता है कि कई बड़े उद्यमियों, कारोबारियों के साथ ही कुछ नेताओं और अधिकारियों के नोट भी संजीव मित्तल ने बदलवाए। नोट बंदी के बाद पुराने नोट बदलने का यह आंकड़ा करीब 125 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। इसी दौरान संजीव मित्तल के पास पुरानी करेंसी बहुत बड़ी मात्रा में इकट्ठा हो गयी थी। लेकिन एनआरआई खातों में भी जब भारतीय पुराने नोट जमा होने बंद हो गए, तो यह 25 करोड़ की पुरानी करेंसी फंस गयी। जिसे बदलवाने के लिए संजीव मित्तल हरसंभव प्रयास कर रहा था।
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एनआरआई खातों से ऐसे बदली गयी करेंसी 
विदेश में लंबे समय से रह रहे भारतीयों से संपर्क साधा गया। उनसे फोन पर ही पूरी डील करके उनके भारत आने-जाने का खर्च संजीव मित्तल और उसके ग्रुप के लोगों ने उठाया। जैसे ही एनआरआई एयरपोर्ट पर उतरा, वैसे ही उसने अपने रुपयों को घोषित कर दिया और इस रुपये को उसके द्वारा आरबीआई की चेस्ट में जमा करा दिया गया। इस खेल में संजीव मित्तल आदि एनआरआई के आने-जाने के खर्च के अतिरिक्त उसे पांच प्रतिशत कमीशन अलग से देते थे। इस तरह इन लोगों ने 125 करोड़ रुपये से ज्यादा रुपये बदलवा दिए। लेकिन जब एनआरआई खातों से भी नोट बदलने बंद हो गए तो संजीव मित्तल के पास 25 करोड़ रुपये फंस गए। जिन्हें अब वह आरबीआई के किसी अधिकारी के माध्यम से बदलवाने के जुगाड़ में लगा था।
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