गांव बिजौली में सैकडों वर्षो से मनाई जाने वाली ऐतिहासिक होली इस वर्ष भी धूम धाम से मनाई गयी। जिसमें इस वर्ष सात तख्त निकाले गये। युवओं ने तख्त के आगे तलवार बाजी व लठबाजी के करतब दिखाये।
गांव बिजौली में सैकडों वर्षो से अजब डंग से होली मनाई जाती है। यहां दुल्हैंडी के दिन पहले पूरे गांव में जमकर कर रंग खिलता है तथा रंग के बाद सभी ग्रामीण नये वस्त्र घारण करते हैं। इसके बाद दोपहर दो बजे से पूरे गांव से अलग अलग मोहल्लों से अलग अलग तख्त निकलते हैं। जिसमें एक तख्त गांव के ही तीन युवाओं को नुकीले हथियारों से बेधा जाता है तथा तीनों तख्त पर सवार होते है। तख्त को गांव के युवा कंधो पर उठाकर गांव में मौजूद गांव के चौक पर ले जाते है तथा बाद में वापस उसी स्थान पर ले जाते हैं। इसके बाद बिधने वाले युवा बैंड बाजों के साथ गांव में बनी महत्मा गंगा पुरी की समाधि पर जाते है तथा समाधिक की पूजा कर वापस लौटते हैं। बिधने के पहले युवओं को होली की राख पूरे शरीर पर लपेटी जाती है।
शरीर के नुकीले हथियार निकालने के बाद घावों पर भी दवा के रूप में केवल होली की राख ही लगाई जाती है। तख्त के दौरान प्रत्येक तख्त पर गुड का प्रसाद चढाया व साडी व पकडा व नगदी का चढावा भी चढाया जाता है। बाद में गुड का प्रसाद बाबा गंगा पुरी की समाधी पर बांटा जाता है। चढावे की सडियों को गांव में गरीब लडियों की शादियों में दान के रूप में दिया जाता है। चढावे में आने वाली नगदी को इसी काम में खर्च किया जाता है। इस वर्ष भी पूरे गांव से सात तख्त निकाले गये। जिसमें पहला तख्त मोहल्ला चौक गुरू दत्त त्यागी के आवास से निकाला गया।
जिसमें डैनी त्यागी, संदीप व गोलू त्यागी को बेधा गया। दूसार तख्त गंगा पुरी जाटव मोहल्ले शिवराज जाटव के आवास से निकाला गया जिसमें मुनित, रोहित व नीरज को बेधा गया। तीसरा तख्त गोला कुआ ब्रामण समाज विरेंद्र शर्मा के आवास से निकाला गया जिसमें कुलदीप बिरजू जाटव व अश्विनी गिरी सभी को बेधा गया। चौथा तख्त खेडेवाला मोहल्ले से महेश त्यागी के आवास से निकाला गया जिसमें राहुल त्यागी, लीलू त्यागी व प्रशांत त्यागी आदि को बेधा गया। पांचवा तख्त भी उसी मोहल्ले का बच्चों का निकाला गया जिसमें महिपाल, राजबीर व सचिन त्यागी को बेधा गया। छठा तख्त जाटव समाज को इश्वर के आवास से निकाला गया जिसमें धीरज, मोनू व राजबीर को बेधा गया। सांतवा तख्त मोहल्ला पछायला से अज्जू त्यागी के आवास से निकाला गया जिसमें संदीप, बिटटू व नाटू को बेधा गया।
700 वर्षो से मनाया जा रहा है पर्व
ग्रांमीण ओकार त्यागी, कानेश्वर त्यागी, प्रदीप त्यागी, सुरेंद्र त्यागी, बलराज त्यागी, महेश, ऋषि त्यागी, धीरज त्यागी, जयनंद शर्मा, सरजीत पंडित, रामकुमार शर्मा, नरेश गिरी, मुकेश गिरी, धीरज गौतम ग्रांम प्रधान, प्रवीण गुप्ता, मीनू खां, गुडडू त्यागी, राजकुमार त्यागी, राहुल त्यागी आदि ग्रांमीणों ने बताया कि यह पर्व गांव में पिछले करीब 700 वर्षो से मनाया जा रहा है। ग्राणों की धारणा है कि गांव में एक गंगापुरी नाम के महात्मा आये थे। एस समय गांव में आ रही महामारी, आग जनी व ओला वृष्टि से गांव के बचाव के लिये महात्मा ने होली के दिन गांव में तख्त निकाले के लिये बताया था। उसी समय से गांव में यह प्रथा चली आ रही है।
हिंदुओं के साथ मुस्लिम समाज भी इस प्रथा में शांमिल रहता है
गांव बिजौली में मनाई जाने वाली ऐतिहासिक तख्त प्रथा में गांव में हिदुओं के साथ मुस्लिम समाज के लोग भी शांमिल रहते है। होली के करीब एक सप्ताह पहले से ही बेधने वाले सभी हथियारों को मुस्लिम समाज के कारीगर ही तैयार करते है। कई वर्ष पहले तो युअवों को बेधने का काम भी मुस्लिमों का ही था लेकिन कारीगरों की कमी के बाद अब केवल हथियार तैयार ही करते हैं।
प्रथा छोडी को पडा अकाल
ग्रांमीणों का कहना है कि कई वर्ष पहले ग्रामीणों ने रूढीवादिता के चलते इस प्रजा को छोड दिया। उसी वर्ष गांव में भयानक अकाल पडा, आग जनी हुई ग्रामीणों की फसलों ने आग लग गयी। अचानक पशुओं की मौत होने लगी। बाद में ग्रामीणों ने इस प्रथा तो दोबारा शुरू किया।