वैसे तो डॉक्टरों को लोग भगवान मानते है, लेकिन जब वही डॉक्टर इंसानियत भूल जाए तो समझो क्या हो। ऐसा ही एक मामला यूपी से सामने आया है। एक युवक को अपने भाई का शव कंधे पर लादकर ले जाने को विवश होना पड़ा।
मामला उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का है। धामपुर में मगर धन को ही सब कुछ मानने वाले उत्तराखंड के एक डाक्टर द्वारा पैसे न देने पर मरीज का शव ले जाने के लिए परिजनों को एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। सिस्टम से हारे धामपुर थाने के गांव जैतरा के पंकज को अपने मृत भाई के शव को कंधे पर लादकर अस्पताल से बाहर ले जाने को विवश होना पड़ा।
गांव जैतरा निवासी पंकज कुमार ने बताया कि वह फलो का ठेला लगाकर परिवार पालता है है। उसका छोटा भाई सचिन उर्फ संजू एक हलवाई की दुकान पर मजदूरी करता था। तीन माह से सचिन के फेफड़ों में इंफेक्शन था। पंकज उसका उपचार नगर के कई डाक्टरों से कराया, मगर उसकी हालत और बिगड़ती चली गई। परिजनों ने उसको दून मेडिकल कालेज में भर्ती कराया। कई टेस्ट कराने को कहा। पंकज के पास पैसे न होने पर उसे नि:शुल्क टेस्ट कराने को लिख दिया गया, लेकिन आधार कार्ड न होने से डाक्टर द्वारा लिखित टेस्ट नहीं हो सके। जिस कारण उपचार के दौरान सचिन की चार दिन पहले तीन मई को मौत हो गई। अब पंकज के सामने मृतक भाई के शव को धामपुर लाना था। दून मेडिकल की एंबुलेंस से अपने भाई का शव धामपुर पहुंचाने की उसने काफी गुहार लगाई। ऐसे में उससे पांच हजार जमा करने को कहा गया। पंकज गिड़गिड़ाया, मगर चिकित्सकों का दिल नहीं पसीजा। पंकज ने इमरजेंसी में तैनात एक डाक्टर से मदद की गुहार की, लेकिन डॉक्टर ने नौकरी का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए।
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