सिर्फ छह साल की उम्र में अपने उस्ताद मौलाना अब्दुल कारी लतीफ का कलाम मुर्शिद का रौजा सुहाना लगता है..को आवाज देकर अनीस साबरी ने अपने करियर की शुरुआत की।
सूफियाना कलाम,गीत,गजल और कव्वाली विधा के पारंगत अनीस साबरी ने मात्र 17 वर्ष की उम्र में हांगकांग में सत्संग में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए विदेशों का सफर शुरू किया।
मुरादाबाद और किराना घराने से जुड़े युवा कलाकार अनीस साबरी ने करीब 10 देशों में अपनी गायकी से देश का नाम रोशन किया। 28 वर्षीय अनीस साबरी वैजयंती माला और संगीतकार एआर रहमान के हाथों अमीर खुसरो संगीत एकेडमी के यंग आर्टिस्ट अवार्ड से वर्ष 2007 और 2008 में नवाजा जा चुका है।
साज और आवाज की दुनिया में छोटी उम्र में पहचान बनाने वाला अनीस साबरी कव्वाल अपने मुंह से जब घुंघरू की आवाज निकालता है तो सामयीन झूम उठते हैं। कीबोर्ड, हारमोनियम,तबला,ढोलक आदि साज का पारंगत अनीस साबरी आकाशवाणी नजीबाबाद से सुगम संगीत के अंतर्गत बी ग्रेड का कलाकार है।