खेतों में हरियाली के स्थान पर बिछ गई सफेद चादर
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बिजनौर में बुधवार को पड़े ओले खेतों में गुरुवार को भी जमे रहे। खेतों में कश्मीर जैसा नजारा था। ऐसा जिले में पहली बार हुआ है कि ओले अगले दिन तक जमे रहे। ओलावृष्टि प्रभावित क्षेत्र में गेहूं, आम, सरसों, चना, बरसीम, आलू आदि खेतों को बहुत भारी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि व बारिश से जिले का तापमान आठ डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। ठंड बढ़ने से काफी दुश्वारियां बढ़ गई हैं।
बुधवार को करीब साढ़े तीन बजे जिला मुख्यालय व आसपास के गांवों में जमकर ओलावृष्टि हुई थी। सड़कों, मकानों के आंगन व छत पर ओलों की चादर सी बिछ गई थी। करीब 20 मिनट तक हुई ओलावृष्टि ने मौसम में ठंडक बढ़ा दी थी। ओलावृष्टि से गेहूं, आम, चना, सरसों, आलू आदि की फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाया है।
ओलों की मार से आम का बौर गिर गया है। सरसों की जिन फली व गेहूं की जिन बाली पर ओले की चोट पड़ती है, उनमें दाना नहीं पड़ता है। ओलों ने गन्ने के अंगोले व बरसीम की फसल को भी बहुत नुकसान पहुंचाया है। इससे किसानों के सामने पशुओं के लिए चारे का संकट भी पैदा हो जाएगा।
ओलों की मार से इस साल आम की फसल भी कम होने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि अभी सभी पेड़ों पर पूरा बौर नहीं आया था। किसान जब गुरुवार सुबह ठिठुरते हुए खेतों पर पहुंचे तो देखा कि खेतों में ओलों की मोटी चादर बिछी हुई थी। किसान यह देखकर हैरत में रह गए।
राम बाग घेर निवासी किसान जगवंत सिंह ने बताया कि उन्होंने जीवन में ऐसा पहली बार देखा है कि इतने घंटे बाद भी ओले न पिघले हों। गन्ने के खेत में ओले की परत जमी हुई हुई थी। उनके बरसीम के खेत को ओले ने बहुत नुकसान पहुंचाया है।