शामली जनपद में भूजल स्तर करीब 200 फीट से नीचे पहुंच गया है। इस कारण जिले के शामली, कैराना, ऊन, थानाभव और कांधला पांचों ब्लाक डार्क जोन घोषित हो चुके हैं। गिरता भूजल स्तर भविष्य में पानी के संकट का संकेत देता है, लेकिन राजनीतिक दलों की निगाह में यह मुद्दा नजर नहीं आ रहा है।
मैली हुई कृष्णा नदी
सहारनपुर जनपद से प्रारंभ होकर कृष्णा नदी शामली जनपद से होते हुए 45 किलोमीटर तक बागपत की हिंडन नदी में जाकर गिरती है। शामली जनपद में कृष्णा नदी मृत प्राय हो चुकी है, जिसका बड़ा कारण कृष्णा नदी में प्रदूषित पानी है। एक समय था जब कृष्णा नदी बिल्कुल साफ होती थी, लेकिन अब तो इसके प्रदूषण का असर आसपास के गांवों तक दिखाई देता है। जलालाबाद क्षेत्र के गांव चंदेनामाल, दभेड़ी सहित कई गांवों में हैंडपंपों से भी प्रदूषित पानी आता है और बीमारियां भी फैल रही हैं। बीमारियों की वजह से पूर्व में कई लोगों की मौत तक हो चुकी हैं। जिले के करीब 37 गांव ऐसे चिह्नित हैं, जो कृष्णा नदी के आसपास हैं और वहां प्रदूषित पानी की समस्या है, लेकिन राजनीतिक दलों के एजेंडे से यह समस्या दूर है।
ट्रैफिक जाम
शामली शहर रोजाना ट्रैफिक जाम से जूझता है। पानीपत-खटीमा, दिल्ली-सहारनपुर और मेरठ करनाल हाइवे शहर के बीच से गुजरते हैं। वाहनों की अधिकता के साथ ही ओवरलोड वाहनों की आवाजाही बढ़ने के कारण ट्रैफिक जाम के कारण समस्या और विकराल हो गई है। शहर के व्यापारी से लेकर आम लोग तक ट्रैफिक जाम के कारण परेशान रहते हैं, लेकिन कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में ट्रैफिक जाम भी नेताओं के मुद्दों से गायब है।
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