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जानिए, कैराना लोकसभा सीट का इतिहास, कांग्रेस के लिए फिर बड़ी चुनौती

Mon, 14 May 2018 04:36 PM IST
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, आनंद प्रकाश, शामली
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फाइल फोटो
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शामली में एक दौर था जब देश में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी अहम मुकाबले में होते थे। कैराना लोकसभा सीट का इतिहास भी इसकी गवाही देता है। क्योंकि आजादी के बाद सात बार हुए लोकसभा चुनाव में कभी कांग्रेस प्रत्याशी जीता तो कभी दूसरे नंबर पर रहा। हालांकि 1989 के बाद कांग्रेस का प्रत्याशी अहम मुकाबले में भी नहीं आ सका। 

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कैराना लोकसभा सीट पर 1984 में कांग्रेस के टिकट पर चौधरी अख्तर हसन सांसद चुने गए थे, जिसके बाद फिर कभी कांग्रेस को इस सीट पर चुनाव जीतने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हो सका है। वर्ष 1962 में बनी कैराना लोकसभा सीट पर अब तक 14 बार चुनाव हो चुका है। इस सीट के सबसे पहले सांसद 1962 में यशपाल सिंह बने थे, जो निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े थे। इसके बाद 1971 के चुनाव में शफक्कत जंग कांग्रेस टिकट पर सांसद बने। इसी दौरान चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस का विपक्षी मोर्चा खड़ा हो गया था, जिसके चलते 1980 के चुनाव में चौधरी चरण सिंह की पत्नी गायत्री देवी 2,03242 वोट लेकर जनता पार्टी (एस) के टिकट पर कैराना लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बन गई थीं। वहीं, 1984 में एक बार फिर से कांग्रेस में जान पड़ी और कांग्रेस प्रत्याशी चौधरी अख्तर हसन कैराना सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। 

इसके बाद ही कांग्रेस का ग्राफ गिरना प्रारंभ हो गया था। 1989 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी बशीर अहमद दूसरे नंबर पर रहे थे, लेकिन उसके बाद हुए सात चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी अहम मुकाबले में भी नहीं आ सके। यही वजह है कि कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में इस बार कांग्रेस अपना प्रत्याशी भी नहीं उतार पाई और गठबंधन को समर्थन दे दिया गया। इसके पीछे बड़ी वजह क्षेत्रीय दलों के रूप में सपा, बसपा, रालोद का लगातार मजबूत होना था, जिस कारण कांग्रेस हाशिये पर आती गई।

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1991 से हर बार अहम मुकाबले में रही भाजपा 

फाइल फोटो
बीते चुनावों में जीत हार के आंकड़ों पर गौर करें तो रालोद ने दो बार, सपा एक बार, भाजपा दो बार और कांग्रेस भी दो बार कैराना सीट पर चुनाव जीती। खास बात यह है कि 1991 के बाद जितने भी चुनाव हुए, उनमें से 2004 के चुनाव को छोड़कर बाकी सभी चुनाव में भाजपा मुकाबले में ही रही। 1991 और 1996 में भाजपा प्रत्याशी उदयवीर सिंह दूसरे नंबर पर रहे थे, तो 1998 में भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र वर्मा ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1999 में भाजपा प्रत्याशी निरंजन सिंह, 2009 में हुकुम सिंह दूसरे नंबर पर रहे थे। फिर 2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह कैराना सीट से सांसद चुने गए। 

------- कैराना सीट के चुनाव का इतिहास 
चुनाव वर्ष ------------ प्रत्याशी -------- पार्टी ------------------ प्राप्त वोट 
1962 -------------- यशपाल सिंह --- निर्दलीय ------------------ 134581 
1967 ------------ गय्यूर अली खान-- सोशलिस्ट पार्टी(एसएसपी)-- 76415
1971----------- शफक्कत जंग ------- कांग्रेस ---------------- 162276 
1977 ----------- चंदन सिंह ----------- बीएलडी ---------------242500 
1980 ----------- गायत्री देवी ---------- जनता पार्टी (एस)-----203242 
1984-------- चौधरी अख्तर हसन ----- कांग्रेस -------------236904
1989---------- हरपाल पंवार --------- जनता दल ---------- 306119 
1991 -------- हरपाल पंवार ---------जनता दल -----------223892
1996-------- मुनव्वर हसन -------- सपा ------------------184636 
1998--------- वीरेंद्र वर्मा ---------- भाजपा ----------------289110
1999 --------अमीर आलम ------- रालोद -----------------206345 
2004-------- अनुराधा चौधरी ----- रालोद/सपा-----------523923
 2009------- तबस्सुम हसन ------ बसपा ----------------283259 
2014-------- हुकुम सिंह -- ------- भाजपा -------------- 565909

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