इसके बाद भुवनेश्वर ने बताया कि वह पचपन से ही पढ़ाई में काफी कमजोर थे, जिसे लेकर उनके माता-पिता चिंतित रहते थे। उस समय की बात है जब भुवी 10वीं की बोर्ड की परीक्षा देने वाले थे और किसी को ये उम्मीद नहीं थी कि भुवी पास हो जाएगा। हालांकि उस समय वह अंडर-15 खेल रहे थे। लेकिन दिलचस्प है कि भुवी ने तीन-तीन ट्यूशन लगाकर पढ़ाई की और 10वीं में 60 फीसदी मार्क्स लाकर फर्स्ट डिवीजन से परीक्षा पास की। भुवी अच्छे नंबरों से पास हुए तो सब हैरान रह गए। लेकिन इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की थी। जिसका फल उन्हें मिला। ठीक उसी तरह भुवी ने क्रिकेट के मैदान पर भी कठोर मेहनत की, जिसकी वजह से आज स्विंग के सुल्तान बन गए।
...जब भुवी ने पिता जी से कहा
उस पल को याद कर भुवनेश्वर शांत हो गए और फिर उन्होंने बताया कि जब पहली बार माता-पिता से क्रिकेट खेलने की बात कही तो उन्होंने पार्क में खेलने की सलाह दी। लेकिन भुवी ने पिता से कहा कि मुझे स्टेडियम में प्रोपर ट्रेनिंग लेकर खेलना है। हालांकि इस बात से परिजन खुश तो नहीं थे, लेकिन उन्होंने बेटे की खुशी के लिए हा बोल दिया। जिसके बाद भुवी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज दुनिया के टॉप क्लास गेंदबाजों में भुवी का नाम आता है। भुवनेश्वर की इस सफलता से उनका परिवार आज बेहद खुश हैं।
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