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बूढ़ी गंगा नदी पर मेले का शुभारंभ  

Sat, 04 Nov 2017 11:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बूढ़ी गंगा नदी पर लगने वाले मेले का विधि विधान पूर्वक शुभारंभ हुआ। मेले का उद्घाटन नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी निषाद् मधुर मय ने वैदिक मंत्रोच्चारण कर किया। ऐतिहासिक एवं पौराणिक बूढ़ी गंगा नदी पर श्रद्धालु दूर दराज से आते हैं। यहां लोग पूजा अर्चना कर धर्म लाभ अर्जित करते हैं। बूढ़ी गंगा नदी पर अपने पितृ की आत्मा की शांति के लिए दीपदान एवं पिंड दान करते है। बूढ़ी गंगा नदी पुल के पास नगर पंचायत द्वारा सफाई कर घाट बनाये गये है। इन घाटों पर मध्य रात्रि से प्रात:काल तक पूजा अर्चना की जाएगी। वहीं, दीपदान एवं पिंड दान कर लोग धर्म लाभ अर्जित करते हैं। यहां जंगल के बीच स्थित अमृत कूप पर भी श्रद्धालुओं ने स्नान किया। मान्यता है कि इस कूप पर महाभारत काल में एक राजा ने स्नान किया था। यहां अस्था के साथ वहां लोग स्नान करते हैं। यहां से लोग जल अपने घरों में ले जाते हैं। मेले में अधिकांश मिट्टी व लकड़ी से बने बर्तनों की खरीददारी भी करते हैं।  
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हर हर गंगे के जयकारों से गूंजे घाट 
खादर क्षेत्र के ग्राम खरखली गांधी गंगाघाट पर कार्तिक पूर्णिमा पर दो दिवसीय गंगा स्नान मेले का उद्घाटन जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर गुर्जर ने फीता काट कर किया। वहीं, मेले में श्रद्धालुओं ने अपने पितृ की आत्म शांति के लिए दीप दान और पूजा अर्चना की। मेले में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने भैंसा बुग्गी और ट्रैक्टर ट्राली से पहुंचकर गंगा में डुबकी लगाकर धर्म लाभ उठाया। तथा मेले को लोगों ने जिला पंचायत द्वारा लगवाने की मांग की।

ग्राम खरखाली गांधी गंगा घाट पर वर्षों से कार्तिक पूर्णिमा पर दो दिवसीय मेले का आयोजन होता आ रहा है। लेकिन इस मेले में सरकार द्वारा कोई मदद न मिलने से यह मेला अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। वहीं, मेले में लाखों श्रद्धालु मेले में पहुंचकर गंगा में डुबकी लगाते हैं। वहीं, मेले में अव्यवस्था के चलते कई बार मेले में बड़ी घटनाऐं हुई है। क्योंकि शासन प्रशासन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
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ग्राम खरखाली खानपुर गढ़ी प्रधान राकेश जिला पंचायत सदस्य मुन्ना गिरी, ब्लॉक प्रमुख केपी खुंटी की देखरेख में दो दिवसीय मेले का आयोजन किया गया। मेले का उद्घाटन जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर सिंह और मुखिया गुर्जर ने फीता काटकर गंगा मैया की पूजा अर्चना की। वहीं, लोगों ने जिला पंचायत अध्यक्ष से मेले को जिला पंचायत द्वारा लगवाने की मांग की। मेले में तहसील मवाना द्वारा किसी गोताखोर की कोई व्यवस्था नहीं हैं। वहीं, पानी का बहाव काफी तेज है। इस मौके पर पूर्व विधायक गोपाल काली, पूर्व जिला पंचायत सदस्य रणपाल सिंह, ग्राम प्रधान वीरपाल सिंह, जयनारायण त्यागी, रोहताश गिरी, कालू बली प्रधान, बिजेंद्र प्रधान, गंगा बल प्रधान, राजवीर सिंह, डॉ. सुशील प्रजापति, गुड्डू शर्मा, महेंद्र गिरी आदि का सहयोग रहा। 

गढ़ मार्ग पर रहे जाम के हालात
किठौर। कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर शुक्रवार को गढ़ गंगा मेले में जाने वाले भक्तों का गढ़ मार्ग पर दिनभर सैलाब उमड़ा रहा। ट्रैक्टर-ट्राली, भैंसा बुग्गी, कार, बसों और अन्य वाहनों के चलते पूरे दिन जाम की स्थिति बनी रही। जाम के चलते कई बार वाहन चालकों और भक्तों में हाथापाई हुई। तिगरी गढ़ कार्तिक गंगा मेले से लाखों भक्त स्नान कर मेरठ गढ़ मार्ग से गुजरते हैं। शुक्रवार को भक्तों ने कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर गढ़ गंगा पहुंचकर दीपदान किया। मार्ग पर अधिक आवागमन के चलते मेरठ गढ़ मार्ग पर जाम की स्थिति बनी रही।

मेले में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
मवाना। मखदूमपुर मेले में शाम के समय श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भैंसा बुग्गी और ट्रैक्टर ट्राली आदि वाहनों से श्रद्धालुओं का गंगा मेले में पहुंचने का क्रम जारी था। जहां दिन में नवविवाहित जोड़ों ने बैंड बाजे के साथ गंगा पूजन किया। वहीं, शाम के लोगों ने अपने पितृ की शांति के लिए दीपदान और पिंडदान किया। गंगा में शाम के समय दीपों की दूर तक जाती कतार मनोहर दृश्य पैदा कर रही थी। जहां दिन में नव विवाहित जोड़ों ने बैंडबाजों के साथ परंपरागत तरीके से गंगा पूजन किया। वहीं, बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराया गया। शाम के समय लोगों ने गंगा में स्नान कर पूजा अर्चना की तथा अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंड दान और दीपदान किया। गंगा में तैरते दीपों की कतार रात के समय बहुत ही मनमोहक नजर आई। 

हर तरफ गूंजे हर हर गंगे के जयकारे 
मवाना। गंगा किनारे हर हर गंगे के उद्घोष से गुंज उठे। अर्ध रात्रि में ही श्रद्धालुओं ने स्नान कर वापस घरों को लौटना शुरू कर दिया था। वहीं, लोगों को परवी लूटने की भी जल्दी थी। आधी रात के बाद श्रद्धालुओं ने गुलाबी सर्दी के मध्य गंगा के ठंडे गंगाजल में डुबकी लगाई। इसके बाद जो श्रद्धालु पूरे साज समान के साथ कई दिन से गंगा मेले में डेरा जमाए पडे़ थे। उन्होंने खिचड़ी का प्रसाद बनाया और उसको ग्रहण करने के बाद अपने गंतव्यों को प्रस्थान करना शुरु किया।

तीन किलो मीटर लंबा जाम लगा
मवाना। शाम के समय उमड़े जन सैलाब के कारण गंगा मेले में वाहनों की तीन किलोमीटर लंबा जाम लग गया। मिनटों के मार्ग से निकलने में लोगों को घंटों का समय लगा। हालांकि इस बार मेले में सुरक्षा के कोई खास प्रबंध नहीं थे। वहीं, असामाजिक तत्वों ने मार्ग पर लगी लाइटों को तोड़ दिया। वहीं, अंधेरे में ईख से निकलने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उधर, गंगा में रेत का खनन जारी था। शुक्रवार सुबह से ही सैकड़ों ट्रैक्टर और ट्राली रेत का खनन कर ढुलाई में जुटी रहीं। हालांकि खनन पर पूर्ण रुप से प्रतिबंध था। वहीं, गंगा किनारे तैनात पीएसी की 43 बटालियन एच कंपनी को बाढ़ से राहत के लिए गोताखोरों को सुरक्षा के लिए तैनात किया गया। कंपनी के एसीपी राकेश सिंह यादव ने बताया कि शाम के समय चिंदौड़ी निवासी प्रदीप और मिंटू डूबने लगे थे। उन्होंने गोताखोरों की मदद से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। 

शिविर में साठ श्रद्धालु को मिला इलाज
 मवाना। गंगा मेले में विहिप और बजरंग दल द्वारा लगाए गए शिविर में मेले में आए लगभग साठ श्रद्धालुओं का निशुल्क इलाज किया गया। वहीं, दवाएं आदि दी गई। वहीं, परिवार से बिछडे़ बच्चों को उनके परिवार तक पहुंचाया गया। शिविर में सुदर्शन चक्र महाराज, बलराज डूंगर, डॉ. ओमपाल सिंह, सौरभ शर्मा, महेश आर्य, आशु त्यागी, नवनीत चौहान, मनोज आदि कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं की सेवा की। वहीं, अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा शिविर लगाकर मेले में आए श्रद्धालुओं को निर्मल गंगा अभियान के तहत लोगों को गंगा के प्रति श्रद्धा व साफ सफाई के प्रति जागरूक किया गया।

दीप दान से मिलती है नेत्र ज्योति
माछरा। गंगा स्नान के लिए गढ़मुक्तेश्वर के लिए क्षेत्र से अनेकों लोग गंगा स्नान के लिए निकले। गंगा घाट पर कुछ लोग अपने बच्चों का मुंडन कराएंगे तो कुछ अपने पूर्वजों का दीपदान करेंगे। मेरठ गढ़ मार्ग पर शुक्रवार को गढ़मुक्तेश्वर गंगा स्नान करने जाने वाले लोगों की बहुत अधिक भीड़ रही। मार्ग पर वाहनों की अधिकता के कारण धीमी गति से वाहन चले। डग्गामार वाहन भी खूब चले। कुछ लोग गंगा के तट पर अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराते है। और कुछ लोग अपने मृत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए गंगा तट पर जाकर दीपदान करते हैं। बताया जाता है कि दीपदान से पूर्वजों को नेत्र ज्योति मिलती है।
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