रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के माध्यम से अब नालों का गंदा पानी भी भूगर्भ में जाएगा। नगर निगम परिसर में मानकों के विपरीत दो स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। जहां ये लगे हैं वहां बरसात के पानी के साथ नालों का पानी भी पहुंचता है। ऐसे में गंदा पानी सीधे भूगर्भ में जाएगा, जो भविष्य में हमारी और आपकी सेहत के काफी खतरनाक हो सकता है।
नगर निगम परिसर की ये है स्थिति
नगर निगम परिसर और उसके बाहर बारिश के दौरान काफी जलभराव हो जाता है। सड़क किनारे बने नालों का गंदा पानी भी बारिश के पानी से साथ मिल जाता है। ऐसे में नालों में भरी गंदगी पानी में तैरती रहती है। इसके अलावा नगर निगम परिसर में उफनते शौचालय टैंकों की गंदगी भी बारिश के पानी के साथ घुल जाती है। अब यह गंदा पानी निगम परिसर में बनाए गए दो रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के माध्यम से भूगर्भ में जाएगा।
केवल बारिश का पानी जाना चाहिए
नगर निगम में नगरायुक्त कार्यालय, बैंक, जलकल विभाग की इमारत, टैक्स विभाग, निर्माण विभाग सहित कर्मचारी आवास भी हैं। अगर नगर निगम भवनों की छत से बारिश का पानी सीधे पाइप लाइन के माध्यम से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में डाला जाए तो माना जा सकता है कि वह पानी भूगर्भ जल को दूषित नहीं करेगा। लेकिन नगर निगम में ऐसा नहीं किया गया है।
20 से अधिक स्थानों पर बनने हैं वाटर हार्वेस्टिंग
शहर में अवस्थापना निधि से 20 से अधिक स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाने हैं। प्रत्येक सिस्टम में लगभग डेढ़ लाख रुपये लागत आ रही है। शहर में पीएसी, पीटीएस, कमिश्नरी आवास, कार्यालय, डीएम आवास और कार्यालय, जिमखाना मैदान, आईटीआई, मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल आदि सहित 20 मुख्य स्थानों पर ये सिस्टम लगने हैं। हालांकि इनमें कुछ स्थानों पर लग गए हैं और कुछ जगहों पर काम चल रहा है।
रिटायर्ड इंजीनियर को दी गई जिम्मेदारी
अवस्थापना निधि से बनाए जा रहे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए धनराशि एमडीए को दी गई है। एमडीए ने फिलहाल दस सिस्टम बनाने का पैसा नलकूप विभाग नोडल एजेंसी को दिया है। नलकूप विभाग ने सभी सिस्टम बनाने की जिम्मेदारी अपने ही विभाग से सेवानिवृत्त इंजीनियर बीडी शर्मा को दी है। बताया गया कि बीडी शर्मा पूर्व में भी कई रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवा चुके हैं। उनकी लिखी किताब और कार्य कुशलता के कारण उनकी जिम्मेदारी पर कमिश्नर ने भी मुहर लगाई है।
भूगर्भ जल को लेकर एनजीटी भी गंभीर
भूगर्भ जल प्रदूषण को लेकर उच्चतम न्यायालय, एनजीटी बेहद गंभीर हैं। कई बार आदेश जारी हो चुके हैं। भूगर्भ जल को दूषित करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी हैं। लेकिन कुछ उद्योग भूगर्भ जल को दूषित करने से बाज नहीं आ रहे हैं। पिछले दिनों नागपुर की एक प्राइवेट कंपनी ने मेरठ जनपद में पानी के नमूने लिए थे। जिसमें भूगर्भ जल दूषित होने के कारण कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ने के संकेत दिए थे। वहीं भूगर्भ जल को दूषित होने से बचाने के लिए जागरूक करने को सरकार करोड़ों रुपये प्रतिवर्ष खर्च करती है। इसके लिए गोष्ठियां होती हैं, रैली निकाली जाती हैं। लेकिन धरातल पर कोई खास कार्य नहीं दिखता।
भविष्य में किया जाएगा इंतजाम
शहर में फिलहाल 20 स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनने हैं। कई स्थानों पर सिस्टम बनकर तैयार हो गए हैं। बाकी पर अभी काम चल रहा है। सिस्टम के माध्यम से भूगर्भ में भवन की छत से ही बारिश का जाना चाहिए। नगर निगम में बनाए गए सिस्टम में जरूर बाहर सड़क का गंदा पानी पहुंचेगा। भविष्य में इसका इंतजाम किया जाएगा। बीडी शर्मा, सेवानिवृत्त सहायक अभियंता नलकूप विभाग
नलकूप विभाग जांचेगा गुणवत्ता
एमडीए केवल नलकूप विभाग को रेन वाटर हार्वेंस्टिंग सिस्टम बनाने का पैसा दे रहा है। इसकी गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी नलकूप विभाग की है। दिनेश चंद तोमर, अधिशासी अभियंता एमडीए