माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। भोला की झाल पर बने 100 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को जल निगम ने बुधवार को 54 दिन बाद चालू तो कर दिया, लेकिन लाइनों की सफाई में नियमों का पालन नहीं किया। बंद लाइनों और जलाशयों की सफाई क्लोरीन युक्त पानी से ही की जा सकती है।
क्लोरीन से लाइनों और जलाशयों में जमा बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं, लेकिन जल निगम ने लाइनों की सफाई में सीधे गंगनहर के पानी का इस्तेमाल किया है। नगर निगम के सहायक अभियंता जलकल सुनील कुमार ने कहा कि शहरवासियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। जल निगम से लाइनों की सफाई क्लोरीन युक्त पानी से कराई जाएगी।
इंडियन वाटर वर्क्स एसोसिएशन के मैनुअल आफ वाटर सप्लाई प्रेक्टिस की क्लोरीनेशन एंड यूज आफ क्लोरीनेटर्स गाइड लाइन के मुताबिक बंद लाइनों व जलाशयों की सफाई के लिए एक निश्चित मात्रा युक्त पानी की आवश्यकता होती है। बंद लाइनों और जलाशयों में बैक्टीरिया उत्पन्न हो जाते हैं, जिसे खत्म करने के लिए क्लोरीन युक्त पानी इस्तेमाल किया जाता है।
नहीं पहुंचा घरों में गंगाजल
अमर उजाला ने बिना टेस्टिंग के ही घरों में गंगाजल पहुंचाने की खबर छापकर जल निगम और नगर निगम अधिकारियों को चेताया था। बृहस्पतिवार को बैकफुट पर आए अधिकारियों ने पानी की बिना जांच कराए घरों में भेजने का प्लान रद कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि सैंपल लैब में भेजे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही आपूर्ति घरों में की जाएगी।