बता दें कि चंद्रशेखर 15 मार्च को राजनीतिक पार्टी की घोषणा करने वाले हैं। जिसके लिए ये बैठक अहम मानी जा रही है। इस बैठक के पीछे युवा सेवा समिति के अध्यक्ष बदर अली की रणनीति मानी जा रही है। मुलाकात के बाद बदर अली ने बताया कि दलित-मुस्लिम और पिछड़ों का नया राजनीतिक गठजोड़ होने जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार बसपा का बड़ा खेमा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की अनदेखी से खफा है। जिसके चलते कई बड़े नेता और कार्यकर्ता भीम आर्मी के संपर्क में हैं। ये पार्टी की घोषणा के साथ चंद्रशेखर के साथ जा सकते हैं। हालांकि 2022 के चुनाव में उनका ये कदम कितना सफल होगा ये समय बताएगा परंतु बसपा के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
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